कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि कर्नाटक सरकार को कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई करेगा।

सौजन्य से:- ईटीवी भारत
कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा
कावेरी नदी से तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होगी.
प्रकाशित : अगस्त 12, 2026 ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. 2:03 अपराह्न भारतीय समय
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि तमिलनाडु सरकार और द्रमुक समेत दूसरों की उन याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी, जिनमें कर्नाटक सरकार को कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है.
कुछ किसानों की ओर से पेश सीनियर वकील पी विल्सन ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच के सामने अर्जी को तुरंत लिस्ट करने के लिए एक अलग याचिका का जिक्र किया.
चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने किसानों की ओर से दायर एक अलग याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि, मामला पहले जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष आना था, लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई को आगे बढ़ाना पड़ा है.
इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि बारिश की कमी वाले साल में राज्य को कावेरी के पानी का उसका सही हिस्सा नहीं मिल रहा है. 10 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया था, जिसमें कर्नाटक सरकार को कावेरी के पानी का उसका हिस्सा तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
3 अगस्त को, जोसेफ विजय की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक सरकार को कावेरी के पानी का हिस्सा तुरंत जारी करने के निर्देश देने की मांग की. इस मामले से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार तमिलनाडु को सही अनुपात में पानी जारी करने में नाकाम रही, जबकि तमिलनाडु का सही अनुपात में हिस्सा 26.954 टीएमसी है.
कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने अगले 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी जारी करने की कावेरी वॉटर रेगुलेशन कमेटी की सिफारिश को सही ठहराया. 2018 में, केंद्र ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के पानी के बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (सी. डब्ल्यू. एम. ए.) बनाई थी. नदी किनारे के राज्यों के सदस्यों के अलावा, बोर्ड में केंद्र का एक नॉमिनी भी होता है.
हाल ही में, डीएमके ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने के निर्देश देने की मांग की. पार्टी ने कहा कि कर्नाटक को सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आखिरी फैसले का सख्ती से पालन करना चाहिए और कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए.
डीएमके ने अपनी अर्जी में कहा, "कर्नाटक राज्य, प्रतिवादी नंबर 1 को सी. डब्ल्यू. आर. सी. के 28 जुलाई, 2026 के निर्देश को तुरंत और पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दें, जैसा कि सी. डब्ल्यू. एम. ए. ने 30 जुलाई, 2026 को पुष्टि किया था. जिसमें इस कोर्ट के आदेश की तारीख से 15 दिनों के समय के लिए बिलिगुंडलु में हर दिन 3,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह पक्का किया जाए, और 29 जुलाई, 2026 से पालन में कमी को पूरा किया जाए."
ये भी पढ़ें: कावेरी नदी से तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने संबंधी याचिका, 13 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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