सुप्रीम कोर्ट का हरियाणा सरकार को निर्देश: कैदियों की समय पूर्व रिहाई नीतियों का दें ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से कैदियों की समय पूर्व रिहाई की नीतियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। यह निर्देश पूर्व विधायक रेलूराम हत्याकांड में दोषी सोनिया और संजीव को अंतरिम जमानत दिए जाने के मामले में सुनवाई के दौरान दिया गया। अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Hisar News: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की कैदियों की समय पूर्व रिहाई की नीतियों का मांगा ब्योरा
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हिसार। पूर्व विधायक रेलूराम हत्याकांड में दोषी सोनिया-संजीव को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत दिए जाने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हरियाण सरकार की कैदियों की रिहाई के बारे में 2000 से लेकर अब तक बनाई गई सभी नीतियों का ब्योरा मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने जितेंद्र व अन्य बनाम संजीव कुमार से संबंधित विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई की। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को मामले से जुड़ी सभी प्रासंगिक नीतियों का संकलन रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। यह निर्देश मामले की व्यापक समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं को नियमित मामलों से पहले सुना जाएगा ताकि त्वरित निपटान सुनिश्चित हो सके। न्यायालय ने कैदियों की रिहाई संबंधी हरियाणा सरकार की सभी नीतियों का संकलन कर रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया जो कि इस मामले के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायक होगी। इसके साथ ही पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक जारी रखने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ताओं जितेंद्र व अन्य की ओर से एडवोकेट लोकेश सिंघल, मुक्ता गुप्ता, आइना वर्मा खोवाल व लाल बहादुर खोवाल ने पक्ष रखा। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 9 दिसंबर 2025 को सुनाए गए फैसले में सोनिया व संजीव को अंतरिम जमानत दी थी। इस फैसले के विरोध में रेलूराम के भतीजे जितेंद्र व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 15 जुलाई की सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिया था।
क्या है मामला
सोनिया व संजीव ने अगस्त 2001 में लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), पुत्र सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पुत्री प्रियंका (14), पोता लोकेश (4), पोतियां शिवानी (2) और 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी थी। मई 2004 में हिसार की अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ही फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
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न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने जितेंद्र व अन्य बनाम संजीव कुमार से संबंधित विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई की। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को मामले से जुड़ी सभी प्रासंगिक नीतियों का संकलन रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। यह निर्देश मामले की व्यापक समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं को नियमित मामलों से पहले सुना जाएगा ताकि त्वरित निपटान सुनिश्चित हो सके। न्यायालय ने कैदियों की रिहाई संबंधी हरियाणा सरकार की सभी नीतियों का संकलन कर रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया जो कि इस मामले के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायक होगी। इसके साथ ही पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक जारी रखने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ताओं जितेंद्र व अन्य की ओर से एडवोकेट लोकेश सिंघल, मुक्ता गुप्ता, आइना वर्मा खोवाल व लाल बहादुर खोवाल ने पक्ष रखा। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 9 दिसंबर 2025 को सुनाए गए फैसले में सोनिया व संजीव को अंतरिम जमानत दी थी। इस फैसले के विरोध में रेलूराम के भतीजे जितेंद्र व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 15 जुलाई की सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिया था।
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क्या है मामला
सोनिया व संजीव ने अगस्त 2001 में लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), पुत्र सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पुत्री प्रियंका (14), पोता लोकेश (4), पोतियां शिवानी (2) और 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी थी। मई 2004 में हिसार की अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ही फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
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