सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: हर लापता व्यक्ति के मामले में तुरंत दर्ज हो FIR
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि किसी भी लापता व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो, के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी। कोर्ट ने पिछली गलत व्याख्या पर नाराजगी जताई और अवमानना पर मुख्य सचिव और डी. जी. पी. को पेश होना होगा।

सौजन्य से:- जागरण
'हर लापता व्यक्ति के मामले में तुरंत दर्ज हो FIR', मानव तस्करी रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी लापता व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो, के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने ...और पढ़ें
मुख्य बातें
- हर लापता व्यक्ति की तुरंत FIR दर्ज हो।
- पिछली गलत व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी।
- अवमानना पर मुख्य सचिव, डी. जी. पी. को पेश होना होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यू. टी.) को निर्देश दिया है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर (चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो) तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ राज्यों को यह गलतफहमी थी कि उसका पिछला निर्देश सिर्फ लापता बच्चों के मामले में लागू होता था।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की बेंच ने इस व्याख्या को जानबूझकर और गलत नीयत से खड़ा किया गया बहाना बताया। बेंच ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक 22 मई के आदेश का पालन करने में नाकाम पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई होगी और उन्हें हुई चूक के बारे में सफाई देने के लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
'जानकर और गलत नियत से फैलाई ये बात'
सोमवार को जारी 5 अगस्त के आदेश में बेंच ने कहा, “हमें यह जानकर हैरानी हुई कि कुछ राज्यों को लगता है कि व्यक्ति शब्द का मतलब सिर्फ बच्चे हैं और इसमें वयस्क शामिल नहीं हैं। हमें लगता है कि ऐसे राज्यों ने जान-बूझकर और गलत नीयत से यह बात फैलाई है।”
यह साफ करते हुए कि उनके पहले के निर्देश में कोई अस्पष्टता नहीं थी बेंच ने कहा, “हमारे पिछले आदेश की भाषा साफ और स्पष्ट है। व्यक्ति शब्द का मतलब हर व्यक्ति से है चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।”
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'आदेश का पालन न करने पर जारी किया जाए नोटिस'
कोर्ट ने आगे यह भी निर्देश दिया कि अगर किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश ने 22 मई के आदेश का पूरी तरह और उसकी असली भावना के साथ पालन नहीं किया है तो संबंधित मुख्य सचिव और डीजीपी को अवमानना का नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
इन दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और कारण बताओ हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी और पालन न करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए और उन्हें सजा क्यों न दी जाए।
कोर्ट ने पिछले आदेश में क्या कहा था?
यह ताजा आदेश तब आया जब बेंच को बताया गया कि 22 मई के उसके निर्देश के तहत सभी राज्यों को किसी भी लापता व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने पर एफआईआर दर्ज करनी थी।
उस आदेश में कोर्ट ने साफ तौर पर हर पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया था कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की जानकारी मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। इसके लिए न तो शुरुआती जांच का इंतजार किया जाए और न ही परिवार से पहले लापता व्यक्ति को खोजने के लिए कहा जाए।
22 मई के आदेश में भी इस तरह की व्याख्या की बहुत कम गुंजाइश छोड़ी गई थी। इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि एफआईआर में किसी व्यक्ति या बच्चे के अपहरण या तस्करी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों को शामिल किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश लापता लोगों, मानव तस्करी और पीड़ितों की बरामदगी व पुनर्वास से निपटने के लिए पूरे देश में एक समन्वित व्यवस्था लागू करने की चल रही प्रक्रिया के तहत जारी किए गए थे।कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया था कि किसी व्यक्ति के लापता होने के बाद के शुरुआती कुछ घंटे गोल्डन आवर्स होते हैं, जिनमें उनके सुरक्षित मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
इसलिए, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि लापता व्यक्ति का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए वे 24 घंटे का इंतजार न करें। यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति का पता 24 घंटे के भीतर ही चल जाता है और उसे परिवार से मिला दिया जाता है, तब भी पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
22 मई के आदेश में यह भी निर्देश दिया गया था कि अगर पुलिस के पास यह मानने का ठोस कारण हो कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में मानव तस्करी शामिल है तो चार महीने की अवधि पूरी होने का इंतजार किए बिना उसे एक विशेष यूनिट को सौंप दिया जाना चाहिए। इसमें केंद्र और सभी राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों को यह भी आदेश दिया गया कि वे अपनी मानव तस्करी-रोधी यूनिटों को चार हफ्ते के भीतर पूरी तरह से चालू और सक्रिय करें।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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