होम›अपराध›बिलासपुर हाईकोर्ट ने लगाया ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन को जिम्मेदार
अपराध

बिलासपुर हाईकोर्ट ने लगाया ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन को जिम्मेदार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है।

12 अगस्त 2026 को 03:55 am बजे
बिलासपुर हाईकोर्ट ने लगाया ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन को जिम्मेदार

सौजन्य से:- अमर उजाला

बिलासपुर: ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, नया कानून लंबित होने का बहाना नहीं चलेगा, पुलिस व प्रशासन को निर्देश

बुध, 12 अगस्त 2026 08:21 पूर्वाह्न भारतीय समय

अमर उजाला ब्यूरो

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

प्रकाशितकर्ता: अमर उजाला ब्यूरो

अद्यतन बुध, 12 अगस्त 2026 08:21 पूर्वाह्न भारतीय समय

सार

ध्वनि प्रदूषण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नया कानून बनने की प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद मौजूदा नियमों और सरकारी निर्देशों के पालन में कोई ढिलाई नहीं बरती जा सकती।

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 के विधायी प्रक्रिया में लंबित होने को मौजूदा नियमों के पालन में ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।

विज्ञापन

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।

विज्ञापन

विधेयक की प्रक्रिया आगे बढ़ी

हाईकोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से पेश किए गए व्यक्तिगत शपथपत्र पर विचार किया। शपथपत्र में बताया गया कि राज्य सरकार ने ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण और नियमन के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

विज्ञापन

गृह विभाग के 31 मार्च 2026 के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधन तैयार करने के लिए एक प्रारूप समिति गठित की गई थी। समिति ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का हिंदी और अंग्रेजी में प्रारूप तैयार कर लिया है। इसके साथ आवश्यक कार्रवाई रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज भी तैयार किए गए हैं। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा।

ये भी पढ़ें: सी. जी.: पोस्ट ऑफिस एजेंट ने 150 खाताधारकों से की करोड़ों की ठगी, शेयर ट्रेडिंग में लगाया पैसा; गिरफ्तार

नया कानून आने तक पुराने नियमों का सख्ती से पालन

कोर्ट ने माना कि प्रस्तावित विधेयक की प्रक्रिया शुरुआती स्तर से आगे बढ़ चुकी है और उचित प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय रूप से विचाराधीन है। इसी को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को शेष प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया और मामले को आठ सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि नए विधेयक के लंबित रहने के दौरान मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों के पालन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती।

पुलिस और प्रशासन को लगातार कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निकायों और अन्य संबंधित एजेंसियों को ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रभावी और निवारक कदम लगातार उठाते रहने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से लाउड स्पीकर, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, ध्वनि विस्तारक यंत्र, पटाखों और अत्यधिक शोर पैदा करने वाले अन्य साधनों के नियमन पर ध्यान देने को कहा।

रात और शांत क्षेत्रों में विशेष सतर्कता

कोर्ट ने रात के समय और शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नया कानून लागू होने तक मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई पूरी सख्ती से जारी रहनी चाहिए। इस आदेश के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मौजूदा नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करें।

न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खड़गे ट्रस्ट मामले में लोकायुक्त से जवाब मांगा
अपराध

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खड़गे ट्रस्ट मामले में लोकायुक्त से जवाब मांगा

बाल मजदूरी पर दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख, आपसी समझौते से नहीं हो सकता मामला खत्म
अपराध

बाल मजदूरी पर दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख, आपसी समझौते से नहीं हो सकता मामला खत्म

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बच्चों के साथ पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की! जानें किन मामलों ने जोड़े खाद
अपराध

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बच्चों के साथ पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की! जानें किन मामलों ने जोड़े खाद

पुलिस की लापरवाही: गंभीर अपराध के आरोपी को मिली डिफॉल्ट बेल
अपराध

पुलिस की लापरवाही: गंभीर अपराध के आरोपी को मिली डिफॉल्ट बेल

सुप्रीम कोर्ट ने सीएम चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ अमरावती भूमि पूलिंग मामले को रद्द करने को बरकरार रखा
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने सीएम चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ अमरावती भूमि पूलिंग मामले को रद्द करने को बरकरार रखा

न्यायमूर्ति सूर्यकांत के विरोध के लिए एन. ए. एल. एस. ए. आर. छात्रों के खिलाफ भारी कार्रवाई
अपराध

न्यायमूर्ति सूर्यकांत के विरोध के लिए एन. ए. एल. एस. ए. आर. छात्रों के खिलाफ भारी कार्रवाई

व्हाइट हाउस बॉलरूम परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की
अपराध

व्हाइट हाउस बॉलरूम परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की

सुप्रीम कोर्ट ने जारी की न्यायिक भाषा की हैंडबुक, अब यौन अपराधों में संवेदनशीलता पर जोर
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने जारी की न्यायिक भाषा की हैंडबुक, अब यौन अपराधों में संवेदनशीलता पर जोर

ताज़ा ख़बरें