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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी करने पर फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने जांच की कि क्यों ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट ने 20‑25 जुलाई के छात्र प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्र को नोटिस भेजा, जबकि उसी दिन कोर्ट ने उन एफआईआर को रद्द कर दिया था और दण्डात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। अदालत ने मजिस्ट्रेट के इस कदम को उसके आदेश का उल्लंघन बताया और छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई को अस्वीकार्य घोषित किया।

9 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी करने पर फटकार लगाई

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी संगठनों के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शनों के समर्थन में कथित अभियान चलाने को लेकर एक छात्र को नोटिस जारी करने पर ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर रद्द कर दी थीं और उनमें भाग लेने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने यह नोटिस कैसे जारी कर दिया.

मालूम हो कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को आदेश दिया था कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए आंदोलन के सिलसिले में देशभर में युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की जाती हैं. अदालत ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की आगे की दंडात्मक कार्रवाई पर भी रोक लगा दी थी.

इसके बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया. इस धारा का इस्तेमाल कार्यकारी मजिस्ट्रेट तब कर सकते हैं, जब उनके पास विश्वसनीय जानकारी हो कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका है.

वरिष्ठ अधिवक्ता बिश्वजीत भट्टाचार्य ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया. उन्होंने बताया कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के एक छात्र को नोटिस जारी किया था. इसमें छात्र से कारण बताने को कहा गया था कि क्यों न उससे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरवाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह शांति बनाए रखेगा.

भट्टाचार्य ने बताया कि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, वकील ने कहा, ‘यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग है. प्रथमदृष्टया यह अदालत की अवमानना है. नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा नहीं कर सकते.’

सीजेआई ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, ‘एक मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी! कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता.’

रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि अगर नोटिस वापस ले लिया गया है तो अब कार्रवाई का आधार क्या बचता है. इस पर भट्टाचार्य ने कहा कि मामला अदालत की अवमानना से जुड़ा है. उन्होंने कहा, ‘यह इस अदालत की गरिमा की अवमानना है. यह देश की सर्वोच्च अदालत है, जो हमारे लोकतंत्र की न्यायिक संस्था है.’

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट-III को नोटिस जारी किया.

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