शहीद मोहन सिंह की पत्नी को मिला इंसाफ सुप्रीम कोर्ट ने दिलाया पेंशन
सुप्रीम कोर्ट ने शहीद मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को उनके अधिकार दिलाने के लिए केंद्र सरकार को आदेश दिया है. सरकार को शहीद के परिवार को उनकी असाधारण पारिवारिक पेंशन को तुरंत जारी करने का भी निर्देश दिया गया है. साथ ही शहीद की पत्नी को ₹10 लाख की अतिरिक्त समेकित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया है.

सौजन्य से:- gnttv.com
सुप्रीम कोर्ट
पति की शहादत के बाद पारिवारिक पेंशन के लिए पत्नी को 26 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े. अब जाकर इंसाफ मिला. सुप्रीम कोर्ट ने 26 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शौर्य चक्र से अलंकृत शहीद मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को उनका हक दिलाया.
शहीद की पत्नी को मिला इंसाफ-
जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह शहीद की पत्नी को ₹10 लाख की अतिरिक्त समेकित राशि का भुगतान करे. साथ ही शहीद के परिवार को उनकी असाधारण पारिवारिक पेंशन को तुरंत जारी करने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने इस मामले में गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए साफ कहा कि जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान किया है, उनके परिवारों या विधवाओं को अपने अधिकारों के लिए दशकों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े ये दुर्भाग्यपूर्ण है. कोर्ट ने कहा कि उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
साल 2000 में हुए थे शहीद-
भारत-चीन सीमा पर एक अहम सड़क निर्माण के दौरान, 10 जुलाई 2000 को मोहन सिंह ने पहाड़ से गिरते मलबे के बीच से अपने साथी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला. इस दौरान वे खुद मलबे की चपेट में आ गए. सरकार ने साल 2001 में उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत देश के तीसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया था.
सरकार ने खारिज कर दी थी पेंशन की मांग-
इसके बाद केंद्र सरकार ने तकनीकी नियमों का हवाला देकर कुलदीप कौर की 'असाधारण पारिवारिक पेंशन' की मांग खारिज कर दी थी. सरकार का तर्क था कि उन्हें पहले ही वर्कमैन कॉम्पेंसेशन एक्ट के तहत मुआवजा मिल चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस केस को गलत कैटेगरी में रखा है. शहीद के इस सर्वोच्च बलिदान को सीसीएस पेंशन नियमों की 'कैटेगरी सी' के तहत विशेष लाभ मिलना चाहिए था.
बकाया रकम दी जा चुकी है- अटॉर्नी जनरल
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और हाईकोर्ट के पुराने आदेश के बाद अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि बकाया राशि जारी की जा चुकी है. कुल ₹14,28,200 की मुख्य राशि कुलदीप कौर को ट्रांसफर की जा चुकी है. जबकि ₹4,12,064 असाधारण पेंशन के बकाए यानी एरियर के रूप में जारी किए गए. इसके साथ ₹10,00,000 की अतिरिक्त समेकित राशि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इंसाफ पाने में विधवा की तरफ से हुई देरी को इस मामले में राहत देने के रास्ते में बाधा नहीं माना जा सकता.
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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