हिरासत में मौत: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीबीआई जांच का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में एक 34 वर्षीय व्यक्ति की हिरासत में मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है और राज्य सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत का मामला सीबीआई को भेजा, ₹25 लाख मुआवजे का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई यह सुनिश्चित करे कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.
By Sumit Saxena
Published : August 13, 2026 at 8:52 AM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि न्याय के हित में छत्तीसगढ़ में 2024 में हिरासत में हुई एक 34 वर्षीय व्यक्ति की मौत के हालात की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए. साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह मृतक की पत्नी और बच्चों को 25 लाख रुपये का मुआवजा दे.
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर को यह पक्का करना चाहिए कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक रेगुलर क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए. बेंच ने निर्देश दिया कि जांच किसी सीनियर सीबीआई अधिकारी को सौंपी जाए, इसे तेजी से पूरा किया जाए और जांच अधिकारी की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट के सामने पेश की जाए.
बेंच ने कहा, 'न्यायिक जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी संबंधित राज्य अधिकारियों द्वारा उचित कदम न उठाने के उनके व्यवहार की भी ठीक से जांच की जाएगी और इसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा.' राज्य के अधिकारियों की आलोचना करते हुए बेंच ने कहा कि यह सफाई कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ न तो पुलिस कार्रवाई हुई और न ही अनुशासनात्मक कार्रवाई, क्योंकि न्यायिक जांच रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को नहीं सौंपी गई थी सिर्फ मामले को छिपाने की कोशिश और कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास था.
अदालत ने कहा, 'इसलिए तथ्यों से साफ पता चलता है कि श्रवण की मौत की परिस्थितियों की तुरंत एफआईआर दर्ज करके अच्छी तरह से जांच होनी चाहिए थी, जिसे राज्य के अधिकारियों ने जान-बूझकर और आसानी से छिपाने की कोशिश की.' बेंच ने इस बात पर ध्यान दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को हाई कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया और जरूरी जानकारी इस कोर्ट के आदेश के बाद ही रिकॉर्ड पर लाई गई, जिससे राज्य के अधिकारियों के मामले में देरी करने वाले रवैये का और पता चलता है.
अदालत ने कहा, 'मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हमारा पक्का मानना है कि न्याय के हित में यह जरूरी है कि श्रवण की कस्टडी में हुई मौत की परिस्थितियों की जांच सीबीआई को सौंपी जाए और कस्टडी में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए गए सभी अधिकारियों के ख़िलाफ जांच पूरी होने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाए.'
बेंच ने छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि केस से जुड़े सभी रिकॉर्ड आज से एक हफ़्ते के अंदर एक स्पेशल मैसेंजर के जरिए सीबीआई डायरेक्टर को भेज दिए जाएं. बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट ने जो निष्कर्ष निकाला था कि मृतक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और राज्य की कस्टडी के दौरान हुई हिंसा के कारण उसकी अप्राकृतिक मौत हुई, उस पर छत्तीसगढ़ राज्य ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई है.
बेंच ने यह आदेश सूर्यवंशी की पत्नी और बच्चों की याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अक्टूबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने माना था कि सूर्यवंशी को कस्टडी में हिंसा का शिकार बनाया गया था और उसी वजह से उनकी मौत हुई. हाई कोर्ट ने यह आदेश 50 लाख रुपये के मुआवजे और कस्टडी में हुई मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ उचित कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपये का बहुत कम मुआवजा दिया और कस्टडी में हुई मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. बेंच ने कहा कि सूर्यवंशी को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 के प्रावधानों के तहत बिलासपुर में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में पकड़ा गया था.
एफआईआर के मुताबिक उसके पास छह लीटर कच्ची 'महुआ' शराब की तीन बोतलें मिली, जिनकी कीमत 1,200 रुपये थी. बेंच ने गौर किया कि सूर्यवंशी को बिलासपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था, जहाँ से 21 जनवरी, 2024 को तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल भेजा गया. इलाज के दौरान 22 जनवरी, 2024 को उसकी मौत हो गई. कोर्ट ने ध्यान दिया कि चूँकि मौत के समय सूर्यवंशी कस्टडी में था, इसलिए जेल सुपरिटेंडेंट ने जिला और सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर कस्टडी में हुई मौत की न्यायिक जाँच कराने का अनुरोध किया था.
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