सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में हिरासत मौत के मामले में अपना रुख सख्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिरासत में मृतक श्रवण सूर्यवंशी के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए राज्य सरकार को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: CBI करेगी जांच; परिवार को 25 लाख मुआवजा
Wed, 12 Aug 2026 09:37 PM IST
अमन कोशले
PTI
PTI
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 12 Aug 2026 09:37 PM IST
सार
बिलासपुर में हिरासत के दौरान हुई श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जांच CBI को सौंपते हुए मृतक की पत्नी और दो नाबालिग बेटियों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस हिरासत में हुई श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सर्वन तामरे की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपते हुए राज्य सरकार को मृतक की पत्नी और दो नाबालिग बेटियों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को मामले में नियमित आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच तेज गति से पूरी करने को कहा है। जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में पेश करनी होगी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBI को श्रवण की हिरासत में हुई मौत के कारणों की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अदालत ने जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में हिरासत के दौरान हिंसा के लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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अदालत ने उन छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए हैं, जिन पर न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे मामले की परिस्थितियों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मृतक के परिवार को राहत देते हुए अदालत ने 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह अंतिम मुआवजा नहीं होगा। मामले की आगे की कार्यवाही और तथ्यों के आधार पर अंतिम राशि निर्धारित की जा सकती है।
यह मामला मृतक की पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों संध्या तथा साक्षी की याचिका से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 3 अक्टूबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने हिरासत में हुई मौत के मामले में परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि FIR दर्ज करने और मौत के कारणों की विस्तृत जांच के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया गया था।
रिकॉर्ड के मुताबिक श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले के सीपत थाना पुलिस ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत गिरफ्तार किया था। पुलिस कार्रवाई छह लीटर कच्ची शराब रखने के आरोप में हुई थी। गिरफ्तारी के बाद श्रवण को केंद्रीय जेल बिलासपुर भेजा गया। 21 जनवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे बिलासपुर स्थित CIMS अस्पताल ले जाया गया, जहां 22 जनवरी 2024 को उसकी मौत हो गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच CBI करेगी और अगली सुनवाई में जांच की प्रगति अदालत के सामने रखी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को मामले में नियमित आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच तेज गति से पूरी करने को कहा है। जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में पेश करनी होगी।
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जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBI को श्रवण की हिरासत में हुई मौत के कारणों की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अदालत ने जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में हिरासत के दौरान हिंसा के लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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अदालत ने उन छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए हैं, जिन पर न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे मामले की परिस्थितियों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मृतक के परिवार को राहत देते हुए अदालत ने 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह अंतिम मुआवजा नहीं होगा। मामले की आगे की कार्यवाही और तथ्यों के आधार पर अंतिम राशि निर्धारित की जा सकती है।
यह मामला मृतक की पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों संध्या तथा साक्षी की याचिका से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 3 अक्टूबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने हिरासत में हुई मौत के मामले में परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि FIR दर्ज करने और मौत के कारणों की विस्तृत जांच के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया गया था।
रिकॉर्ड के मुताबिक श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले के सीपत थाना पुलिस ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत गिरफ्तार किया था। पुलिस कार्रवाई छह लीटर कच्ची शराब रखने के आरोप में हुई थी। गिरफ्तारी के बाद श्रवण को केंद्रीय जेल बिलासपुर भेजा गया। 21 जनवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे बिलासपुर स्थित CIMS अस्पताल ले जाया गया, जहां 22 जनवरी 2024 को उसकी मौत हो गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच CBI करेगी और अगली सुनवाई में जांच की प्रगति अदालत के सामने रखी जाएगी।
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