छपार थाना क्षेत्र के गांव तेजलहेड़ा में 26 साल बाद सुनाई गई सालिम हत्याकांड की सजा
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपराधी को फांसी की सजा सुनाई. आरोपी ने पॉपलर की लकड़ी की डीलिंग के लिए अपहरण के बाद हत्या की वारदात को अंजाम दिया था.

सौजन्य से:- ईटीवी भारत
26 साल बाद इंसाफ! बहुचर्चित सालिम हत्याकांड के दोषी शाहनवाज को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा, 1.10 लाख रुपये जुर्माना
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया फैसला, आरोपी ने अपहरण के बाद हत्या की वारदात को दिया था अंजाम
ई. टी. वी. भारत उत्तर प्रदेश टीम द्वारा
प्रकाशित : अगस्त 12, 2026 ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. 7:21 अपराह्न भारतीय समय
मुजफ्फरनगर : छपार थाना क्षेत्र के गांव तेजलहेड़ा के बहुचर्चित सालिम हत्याकांड में 26 साल बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दोषी शाहनवाज को फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने शाहनवाज को दोषी पाते हुए मृत्युदंड के साथ-साथ एक लाख 10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है.
सरकारी वकील कुलदीप कुमार के अनुसार, घटना की शुरुआत 9 दिसंबर 1999 को हुई थी. तेजलहेड़ा निवासी मोहम्मद आबाद, हारुन पुत्र सालिम और मुकर्रम ट्रैक्टर-ट्रॉली में पॉपलर की लकड़ी लेकर यमुनानगर की ओर जा रहे थे. गांव के पास रजवाहे की पटरी पर तीन हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें रोक लिया. तमंचे के बल पर हारुन और मुकर्रम का अपहरण कर लिया गया, जबकि आबाद किसी तरह वहां से निकलकर गांव पहुंचा और परिजनों को घटना की जानकारी दी.
दो दिन बाद मुकर्रम बदमाशों के चंगुल से निकलकर घर पहुंच गया. उसने बताया कि हारुन अभी बदमाशों के कब्जे में है. इसके बाद बदमाशों ने हारुन के पिता सालिम के पास पत्र भेजकर पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी और उन्हें जंगल में रकम लेकर आने के लिए कहा.
19 जनवरी 2000 को सालिम अपने साथियों के साथ बदमाशों के बताए स्थान पर पहुंचे. वहां बदमाशों ने हारुन को उनके सामने लाकर दिखाया. फिरौती की रकम का इंतजाम करने के लिए हारुन को छोड़ दिया गया, जबकि उसके पिता सालिम को बदमाशों ने अपने कब्जे में रख लिया. बाद में फिरौती की रकम नहीं मिलने पर बदमाशों ने सालिम की हत्या कर दी.
25 जनवरी 2000 को लक्सर थाना क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना मिली. अगले दिन परिजनों ने जिला अस्पताल हरिद्वार पहुंचकर शव की पहचान सालिम के रूप में की. इसके बाद पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की.
जांच में शाहनवाज समेत तीन आरोपियों के नाम सामने आए. मामले में शामिल अन्य आरोपियों में शौकीन और एहसान भी थे, जिनकी बाद में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई. शाहनवाज के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर धारा 364ए, 302, 201 और 120बी के तहत आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया.
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने प्रभावी पैरवी की. अभियोजन ने अदालत में सात महत्वपूर्ण गवाह पेश किए और घटना से जुड़े साक्ष्यों एवं तथ्यों को मजबूती से रखा. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने शाहनवाज को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय का उद्देश्य केवल सजा सुनाना नहीं, बल्कि समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना भी है.
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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