सुप्रीम कोर्ट ने 8½ साल की अंडरट्रायल हिरासत पर चिंता जताकर 6 महीने में मुकदमा समाप्त करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने चोरी के एक मामले में 8½ साल से जेल में बंद अंडरट्रायल आरोपी की लंबी हिरासत को चिंताजनक बताया, जमानत से इनकार कर दी और ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि वह छह महीने के भीतर मुकदमा समाप्त करे, जबकि केवल छह गवाहों की गवाही दर्ज हुई थी और आरोपी के पूर्व अपराधों को जमानत देने में बाधा माना गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने अंडरट्रायल की लंबी हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का आधार नहीं बन सकती।
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने चोरी के मामले में साढ़े आठ साल से जेल में बंद अंडरट्रायल की लंबी हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक मुकदमा लंबित रहना चिंताजनक है और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का आधार नहीं बन सकती। पीठ ने ट्रायल छह महीने में पूरा करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने चोरी के एक मामले में पिछले साढ़े आठ साल से न्यायिक हिरासत में बंद एक अंडरट्रायल आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मुकदमे की धीमी गति और आरोपी की लंबी हिरासत को गंभीरता से लेते हुए ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर मुकदमा पूरा करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पश्चिम बंगाल के एक मामले में यह आदेश दिया है। आरोपी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
ज्वेलरी शॉप में हुई थी वारदात
मामला कोलकाता की एक ज्वेलरी दुकान में हुई चोरी और मारपीट से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अन्य लोगों के साथ मिलकर दुकान में घुसा और दुकान मालिक तथा कर्मचारियों पर हमला कर डिस्प्ले बॉक्स में रखी ज्वेलरी लूट ली। इस घटना में करीब 752.100 ग्राम सोने के आभूषण चोरी हुए थे, जिनकी उस समय कीमत करीब 21.66 लाख रुपये थी। कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की एंटी-डाकैती सेक्शन ने आरोपी और अन्य आरोपियों का पता लगाया था।
साढ़े आठ साल में सिर्फ छह गवाहों की गवाही
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की लंबी हिरासत पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि वह आठ साल छह महीने से अंडरट्रायल के रूप में न्यायिक हिरासत में है, लेकिन अब तक केवल छह गवाहों की ही गवाही हो सकी है। अदालत ने मुकदमे की स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया। अदालत ने माना कि इतनी लंबी अवधि तक बिना ट्रायल पूरा हुए जेल में रहने के आधार पर वह आरोपी की जमानत याचिका पर अनुकूल विचार कर सकती थी।
पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड बना जमानत में बाधा
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पूर्व आपराधिक मामलों में इसी तरह के अपराधों में उसकी संलिप्तता उसके पक्ष में विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने में बड़ी बाधा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी के पूर्ववृत्त (antecedents) इस प्रकार के नहीं होते, तो केवल अंडरट्रायल के रूप में इतनी लंबी अवधि जेल में बिताने के आधार पर जमानत देने पर विचार किया जा सकता था। लेकिन समान प्रकृति के अपराधों में उसकी पूर्व संलिप्तता को देखते हुए अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
छह महीने में हर हाल में ट्रायल पूरा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से इनकार करने के साथ यह सुनिश्चित किया कि आरोपी को मुकदमे की धीमी गति के कारण अनिश्चितकाल तक जेल में न रहना पड़े। पीठ ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाए और आदेश की तारीख से छह महीने के भीतर पूरा ट्रायल हर हाल में समाप्त करे। अदालत ने ट्रायल पूरा होने के बाद उसकी स्थिति से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराने का भी निर्देश दिया। इन निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें
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