शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया
फास्ट‑ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने कहा कि केवल शादी का वादा न पूरा होना अपराध नहीं है; उसे अपराध मानने के लिए यह सिद्ध होना चाहिए कि प्रारम्भ से ही धोखे का इरादा था। सोशल मीडिया से जुड़ी दोस्ती के बाद विवाह की बातों पर चर्चा हुई, लेकिन जब शादी के दिन दुल्हन अनुपलब्ध रही तो विवाद उत्पन्न हुआ और बीएनएस धारा 69 के तहत केस दर्ज हुआ, जिसे अदालत ने अंततः बरी कर दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
हिमाचल प्रदेश: शादी का वादा टूटा, आरोपी बरी; अदालत ने कहा- हर वादा टूटना अपराध नहीं
शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने शादी का वादा टूटने से जुड़े मामले में आनी निवासी आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल शादी का वादा पूरा न होना अपराध नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि आरोपी की नीयत शुरुआत से ही धोखा देने की थी। पढ़ें पूरी खबर...
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शादी का वादा करने के बाद रिश्ता टूट जाना हर स्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता। शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में आनी, कुल्लू निवासी आरोपी युवक को बरी कर दिया है।
अदालत ने मामले में स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा टूट जाना अपने आप में अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की नीयत शुरुआत से ही धोखा देने की थी। यानी यदि शुरुआत में शादी करने का इरादा था, लेकिन बाद में परिस्थितियों के कारण रिश्ता नहीं हो पाया, तो इसे स्वतः आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। मामले के अनुसार युवक और युवती की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। दोस्ती आगे बढ़ी और दोनों करीब 10 माह तक एक कमरे में मिलते रहे। इस दौरान दोनों के बीच शादी को लेकर भी बात हुई थी।
मामले में मोड़ 14 दिसंबर 2024 को आया। युवक अपने माता-पिता के साथ युवती के गांव में शादी की बात करने जा रहा था। हालांकि, युवती उस समय वहां मौजूद नहीं थी। इसे लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद हो गया और शादी का रिश्ता टूट गया। इसके बाद युवती ने थाना बालूगंज में शिकायत दर्ज कराई। मामले में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 के तहत केस दर्ज किया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया गया।
अदालत ने आरोपी को आरोपों से बरी करते हुए कहा कि शादी का वादा पूरा न होना और शुरुआत से ही शादी के नाम पर धोखा देने की मंशा होना, दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए यह स्थापित होना जरूरी है कि शादी का वादा करते समय उसकी नीयत ही गलत थी। इस फैसले में अदालत ने रिश्ते के दौरान बने हालात और शादी टूटने की परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत के निर्णय के बाद आरोपी को मामले में राहत मिली है।
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