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नेताजी की अस्थियों की वापसी की मांग: बेटी अनीता पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बी. फाफ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर टोक्यो से नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग की है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। अनीता चाहती हैं कि उनके पिता की अस्थियों का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाए।

11 अगस्त 2026 को 10:57 am बजे
नेताजी की अस्थियों की वापसी की मांग: बेटी अनीता पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Supreme Court: नेताजी की बेटी अनीता पहुंचीं शीर्ष अदालत, केंद्र को नोटिस; टोक्यो से अस्थियां लाने की उठी मांग

Tue, 11 Aug 2026 03:56 PM IST

राकेश कुमार

पीटीआई, नई दिल्ली।

पीटीआई, नई दिल्ली।

Published by: राकेश कुमार

Updated Tue, 11 Aug 2026 03:56 PM IST

सार

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बी. फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से नेताजी की अस्थियां भारत लाकर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की मांग की गई है।

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विस्तार

टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों को भारत वापस लाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस बार यह मांग किसी संगठन या दूर के रिश्तेदार ने नहीं, बल्कि खुद उनकी बेटी अनीता बी. फाफ ने उठाई है। उच्चतम न्यायालय ने इस भावुक और ऐतिहासिक मामले पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि नेताजी की अस्थियों को सम्मानपूर्वक स्वदेश लाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत में अनीता फाफ का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बेटी अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ भारत में निभाना चाहती है।

मार्च की सुनवाई और अदालत की टिप्पणी

इसी साल मार्च के महीने में उच्चतम न्यायालय ने नेताजी के परपोते आशीष राय की ऐसी ही एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि अगर मुख्य वारिस यानी नेताजी की बेटी खुद सामने आती हैं, तभी इस पर कानूनी कदम उठाया जाएगा। अदालत की इसी टिप्पणी के बाद अब अनीता फाफ ने सीधे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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1945 का रहस्य और रेंकोजी मंदिर

अगस्त 1945 में नेताजी के लापता होने के बाद से कई तरह की धारणाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, कई रिपोर्टों और दावों में माना गया है कि उनके अवशेष जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे हुए हैं। अब सर्वोच्च अदालत के इस कदम से वर्षों पुराने इस संवेदनशील मामले में ठोस प्रगति की उम्मीद जगी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि नेताजी की अस्थियों को सम्मानपूर्वक स्वदेश लाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत में अनीता फाफ का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बेटी अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ भारत में निभाना चाहती है।

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मार्च की सुनवाई और अदालत की टिप्पणी

इसी साल मार्च के महीने में उच्चतम न्यायालय ने नेताजी के परपोते आशीष राय की ऐसी ही एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि अगर मुख्य वारिस यानी नेताजी की बेटी खुद सामने आती हैं, तभी इस पर कानूनी कदम उठाया जाएगा। अदालत की इसी टिप्पणी के बाद अब अनीता फाफ ने सीधे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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1945 का रहस्य और रेंकोजी मंदिर

अगस्त 1945 में नेताजी के लापता होने के बाद से कई तरह की धारणाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, कई रिपोर्टों और दावों में माना गया है कि उनके अवशेष जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे हुए हैं। अब सर्वोच्च अदालत के इस कदम से वर्षों पुराने इस संवेदनशील मामले में ठोस प्रगति की उम्मीद जगी है।

टीएमसी के बैंक खातों पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार

तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों पर लगी रोक से जुड़ी कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट से पार्टी को कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके तहत वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद बैंक खातों के लेनदेन पर पाबंदी लगाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाईकोर्ट का रुख

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने हाईकोर्ट के निर्देशों में बदलाव करने से मना कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने टीएमसी को विशेष अधिकारी के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। अब पार्टी को अपनी बात रखने के लिए 14 दिनों के भीतर विशेष अधिकारी के पास जाना होगा।

क्या है स्पेशल अफसर की निगरानी का दायरा

इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी को थोड़ी मोहलत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पार्टी अपने रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों के लिए इन खातों से पैसों का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी की सीधी देखरेख में ही पूरी होगी। खातों से किसी भी अन्य अनधिकृत लेनदेन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

फंड डायवर्जन की प्राथमिकी से जुड़ा है मामला

पूरा मामला बैंक खातों से फंड की अवैध हेराफेरी और डायवर्जन के आरोपों से जुड़ा है। इसको लेकर पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ही इन तीनों बैंक खातों के लेनदेन को फ्रीज किया गया था। इस फैसले के बाद पार्टी को अपने नियमित प्रशासनिक कामकाज चलाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाईकोर्ट का रुख

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने हाईकोर्ट के निर्देशों में बदलाव करने से मना कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने टीएमसी को विशेष अधिकारी के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। अब पार्टी को अपनी बात रखने के लिए 14 दिनों के भीतर विशेष अधिकारी के पास जाना होगा।

क्या है स्पेशल अफसर की निगरानी का दायरा

इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी को थोड़ी मोहलत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पार्टी अपने रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों के लिए इन खातों से पैसों का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी की सीधी देखरेख में ही पूरी होगी। खातों से किसी भी अन्य अनधिकृत लेनदेन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

फंड डायवर्जन की प्राथमिकी से जुड़ा है मामला

पूरा मामला बैंक खातों से फंड की अवैध हेराफेरी और डायवर्जन के आरोपों से जुड़ा है। इसको लेकर पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ही इन तीनों बैंक खातों के लेनदेन को फ्रीज किया गया था। इस फैसले के बाद पार्टी को अपने नियमित प्रशासनिक कामकाज चलाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

साइबर अपराध पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर होने वाले गंभीर अपराधों को लेकर केंद्र सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी। इसमें महिलाओं को बलात्कार की धमकी, निजी जानकारी वायरल करने और अश्लील सामग्री जैसी समस्याओं पर तुरंत रोक लगाने के लिए एक निगरानी व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी।

केंद्र सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि इंटरनेट अपराधों को कैसे रोका जाए, यह तकनीकी विशेषज्ञों का काम है। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स, गृह और कानून मंत्रालय को याचिकाकर्ता की मांग पर विचार करने और जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

केंद्र सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि इंटरनेट अपराधों को कैसे रोका जाए, यह तकनीकी विशेषज्ञों का काम है। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स, गृह और कानून मंत्रालय को याचिकाकर्ता की मांग पर विचार करने और जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

पश्चिम बंगाल मतदाता सूची मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा हिसाब, ट्रिब्यूनल के काम की होगी समीक्षा

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन के दौरान कई लोगों के नाम हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि हटाए गए लोगों की अपीलों को निपटाने के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल ने अब तक कितने मामलों का फैसला किया है।

राशन कार्ड और मतदाता सूची अलग मामले

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कोर्ट में दलील दी कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण लोगों का राशन (पीडीएस) बंद हो रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राशन बंद होने का मामला अलग है। इसके लिए उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट जाना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन के दौरान कई लोगों के नाम हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि हटाए गए लोगों की अपीलों को निपटाने के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल ने अब तक कितने मामलों का फैसला किया है।

राशन कार्ड और मतदाता सूची अलग मामले

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कोर्ट में दलील दी कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण लोगों का राशन (पीडीएस) बंद हो रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राशन बंद होने का मामला अलग है। इसके लिए उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट जाना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

आतंकवाद से जुड़े इंटरनेट मामले में सुनवाई की समय-सीमा तय, एक साल में पूरा करना होगा ट्रायल

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक विशेष अदालत को आतंकवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई एक साल के अंदर पूरी करने का आदेश दिया है। यह मामला इंटरनेट के जरिए युवाओं को भड़काने और आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रचार करने से जुड़ा हुआ है।

छह महीने में होगी गवाहों की गवाही

यह याचिका आरोपी मोहम्मद हिदायतुल्लाह की तरफ से दायर की गई थी। आरोपी अक्टूबर 2022 से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत को निर्देश दिया है कि वह मुख्य और सुरक्षित गवाहों के बयान छह महीने में दर्ज करे। साथ ही, जरूरत पड़ने पर रोज सुनवाई करके मामले को जल्द से जल्द खत्म करे।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक विशेष अदालत को आतंकवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई एक साल के अंदर पूरी करने का आदेश दिया है। यह मामला इंटरनेट के जरिए युवाओं को भड़काने और आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रचार करने से जुड़ा हुआ है।

छह महीने में होगी गवाहों की गवाही

यह याचिका आरोपी मोहम्मद हिदायतुल्लाह की तरफ से दायर की गई थी। आरोपी अक्टूबर 2022 से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत को निर्देश दिया है कि वह मुख्य और सुरक्षित गवाहों के बयान छह महीने में दर्ज करे। साथ ही, जरूरत पड़ने पर रोज सुनवाई करके मामले को जल्द से जल्द खत्म करे।

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