पत्रकार रामचंद्र हत्याकांड का नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में होगी निर्णय
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड के मामले में बरी कर दिया था. लेकिन अब उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रेम कोर्ट आ गए हैं.

सौजन्य से:- ETV Bharat
राम रहीम की मुश्किलें बढ़ी! सुप्रीम कोर्ट में होगी पत्रकार रामचंद्र हत्याकांड की सुनवाई, हाई कोर्ट ने किया था बरी
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को रामचंद्र के बेटे ने चैलेंज किया है.
Published : August 11, 2026 at 2:56 PM IST
सिरसा: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है. ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. दरअसल पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया था. जिसके बाद रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने अंशुल की दायर SLP को स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस पूरे मामले पर अंशुल छत्रपति ने सीबीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
राम रहीम को हाई कोर्ट ने किया था बरी: बता दें कि 17 जनवरी 2019 को पंचकूला सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ राम रहीम ने हाई कोर्ट में अपील की थी. लंबी चली चुनवाई के बाद 7 मार्च 2026 को हाई कोर्ट ने डेरा प्रमुख को बरी कर दिया था, जबकि अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी थी.
अंशुल छत्रपति ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा: हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. जहां उनकी विशेष अनुमति याचिका SLP एडमिट कर ली गई है. कोर्ट ने राम रहीम समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है.
CBI की कार्यशैली पर उठाए सवाल: अंशुल छत्रपति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम रहीम के खिलाफ मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI पर भी तीखे सवाल दागे. अंशुल ने पूछा कि "आखिर CBI ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल नहीं की? हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. जिससे जांच एजेंसी की साख दांव पर लगी है." अंशुल ने कहा "ये हमारे लिए राहत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी याचिका को स्वीकर कर आरोपियों को नोटिस भेजा है. आगे की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाएगी. पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का जो फैसला था. वो जायज नहीं है. सीबीआई ने लंबी जांच की. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को मुख्य षडयंत्रकर्ता बनाया. इसके अलावा तीन सह आरोपी थे. सारे सबूत और गवाह ये क्लियर करते हैं कि राम के इशारे पर ये सब किया गया. हाई कोर्ट ने इस सबूत को नजरअंदाज किया. हमारी मांग है कि उसकी सजा को बरकरार रखा जाए."
क्या है रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: ये मामला हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है. अक्टूबर 2002 में बदमाशों ने घर के बाहर ही उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. रामचंद्र छत्रपति 'पूरा सच' अखबार के संपादक थे. उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण से जुड़ी खबरें प्रकाशित की थीं. इसलिए इस हत्या का इल्जाम राम रहीम पर लगा था.
सबसे पहले पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने ठहराया था दोषी: इस मामले में 2019 में विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह समेत चार लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हालांकि, मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया, जबकि अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी गई. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है.
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