रोहतक में दुष्कर्म‑धोखाधड़ी के आरोपी को अदालत ने बरी किया
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी यादव की अदालत ने इंदिरा कॉलोनी के आशीष को दुष्कर्म, धोखाधड़ी और दूसरी शादी छिपाने के आरोपों से बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया। पीड़िता ने मार्च 2023 में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आशीष के अविवाहित दिखा कर शादी करना, सोना‑चांदी का हार‑जवाहरात व नकदी चुराना तथा उसकी पहले से विवाहित होने की बात छिपाना बताया गया था। प्रथम पत्नी के बयान के बावजूद अदालत ने सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Rohtak News: दुष्कर्म, धोखाधड़ी के आरोपी को अदालत ने किया बरी
Sun, 06 Sep 2026 09:25 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 06 Sep 2026 09:25 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी यादव की अदालत ने इंदिरा कॉलोनी निवासी आशीष को तीन सितंबर को बरी कर दिया है। आशीष पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और दूसरी शादी छिपाने के गंभीर आरोप थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
पीड़िता ने 13 मार्च 2023 को महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि आशीष ने खुद को अविवाहित बताकर जून 2022 में आर्य समाज मंदिर में उससे विवाह किया। दोनों किराये के मकान में साथ रह रहे थे। पीड़िता का आरोप था कि मार्च 2023 में आशीष उसके सोना-चांदी के जेवर और नकदी लेकर फरार हो गया। इसके बाद उसे पता चला कि आशीष पहले से विवाहित है।
आशीष की पहली पत्नी ने अदालत में बयान दिया कि पीड़िता 2017 से उनके पड़ोस में रहती थी। उसे आशीष के शादीशुदा होने की पूरी जानकारी थी। 2018 में पहली पत्नी ने पीड़िता के घर जाकर उसे आशीष से दूर रहने को भी कहा था। अदालत ने माना कि पीड़िता को शादीशुदा होने की बात छिपाकर धोखे में रखने का दावा गलत साबित होता है।
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शुरुआती शिकायत में दुष्कर्म का कोई जिक्र नहीं था। 13 मार्च 2023 की शिकायत और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में भी यह आरोप नहीं था। घटना के 16-18 दिन बाद दुष्कर्म की धारा जोड़ी गई। अभियोजन पक्ष इसके लिए कोई ठोस कारण नहीं बता पाया। आर्य समाज के पंडित ने अदालत में विवाह पत्र तैयार करने से इन्कार किया। उन्होंने फोटो में मौजूद व्यक्तियों को पहचानने से भी इन्कार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आर्य समाज मंदिर का प्रमाण पत्र वैध विवाह का कानूनी सबूत नहीं है। इन्हीं कारणों से आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया गया।
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रोहतक। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी यादव की अदालत ने इंदिरा कॉलोनी निवासी आशीष को तीन सितंबर को बरी कर दिया है। आशीष पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और दूसरी शादी छिपाने के गंभीर आरोप थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
पीड़िता ने 13 मार्च 2023 को महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि आशीष ने खुद को अविवाहित बताकर जून 2022 में आर्य समाज मंदिर में उससे विवाह किया। दोनों किराये के मकान में साथ रह रहे थे। पीड़िता का आरोप था कि मार्च 2023 में आशीष उसके सोना-चांदी के जेवर और नकदी लेकर फरार हो गया। इसके बाद उसे पता चला कि आशीष पहले से विवाहित है।
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आशीष की पहली पत्नी ने अदालत में बयान दिया कि पीड़िता 2017 से उनके पड़ोस में रहती थी। उसे आशीष के शादीशुदा होने की पूरी जानकारी थी। 2018 में पहली पत्नी ने पीड़िता के घर जाकर उसे आशीष से दूर रहने को भी कहा था। अदालत ने माना कि पीड़िता को शादीशुदा होने की बात छिपाकर धोखे में रखने का दावा गलत साबित होता है।
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शुरुआती शिकायत में दुष्कर्म का कोई जिक्र नहीं था। 13 मार्च 2023 की शिकायत और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में भी यह आरोप नहीं था। घटना के 16-18 दिन बाद दुष्कर्म की धारा जोड़ी गई। अभियोजन पक्ष इसके लिए कोई ठोस कारण नहीं बता पाया। आर्य समाज के पंडित ने अदालत में विवाह पत्र तैयार करने से इन्कार किया। उन्होंने फोटो में मौजूद व्यक्तियों को पहचानने से भी इन्कार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आर्य समाज मंदिर का प्रमाण पत्र वैध विवाह का कानूनी सबूत नहीं है। इन्हीं कारणों से आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया गया।
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