नाबालिग शादी को नहीं बचा सकी व्यक्तिगत कानून की दलील, हाई कोर्ट ने लगाया POCSO लागू
केरल हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ वैवाहिक संबंध होने पर भी POCSO लागू होगा, चाहे वह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी हो। न्यायालय ने Supreme Court के Independent Thought मामले को हवाला देते हुए, विवाह की आयु‑सीमा को 18 के बराबर मानते हुए, व्यक्तिगत कानून को अधिनियम के ऊपर नहीं आना दिया। इस निर्णय में POCSO की सेक्शन 42A के अधिभावी प्रभाव को भी रेखांकित किया गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
क्या मुसलमानों को UCC से बाहर रखने की मांग जायज है? जानिए संविधान, अनुच्छेद 44 और सुप्रीम कोर्ट का कानूनी नजरिया
केरल हाई कोर्ट में मामला, तथ्यों पर दिया फैसला
- मामले में आरोपी के वकील ने बताया कि उसने साल 2021 में, जब लड़की 17 साल और एक महीने की थी, इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों परिवारों की उपस्थिति में उससे शादी की थी। लड़की, मस्जिद के काज़ी और उसके भाई ने पुलिस को दिए अपने बयानों में इस शादी की पुष्टि की है।
- आरोपी ने हाई कोर्ट से अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। उसका तर्क था कि संबंधित लड़की उसकी पत्नी है और इसलिए वैवाहिक संबंध को देखते हुए उसके खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
- जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध होने पर POCSO लागू हो सकता है, चाहे वह आरोपी की पत्नी ही क्यों न हो।
- अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के Independent Thought v. Union of India फैसले का भी सहारा लिया, जिसमें नाबालिग पत्नी के संदर्भ में IPC की Marital Rape Exception को 18 वर्ष की उम्र के अनुरूप पढ़ा गया था।
Personal Law का हवाला क्यों काम नहीं आया?
- याचिकाकर्ता की ओर से वैवाहिक संबंध और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े तर्क भी रखे गए थे। लेकिन हाई कोर्ट ने POCSO की विशेष प्रकृति पर जोर दिया।
- POCSO की Section 42A यह बताती है कि Act का प्रभाव अन्य कानूनों के अतिरिक्त है और किसी असंगति की स्थिति में POCSO के प्रावधानों को overriding effect यानी अधिभावी प्रभाव मिलता है।
- इसी आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि यदि POCSO के तहत किसी नाबालिग माना जाता है, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत विवाह होने का तथ्य उस संरक्षण को खत्म नहीं कर सकता।
POCSO एक्ट Child Marriage कानूनों से अलग कैसे हैं?
POCSO विशेष रूप से बच्चों को यौन अतिक्रमण से संरक्षण देता है। इसलिए किसी विवाह को लेकर PCMA के तहत कानूनी स्थिति अलग प्रश्न हो सकती है, जबकि उसी विवाह में नाबालिग के साथ यौनाचार पर POCSO की लागू होने की शर्त अलग से तय हो सकती है। लेकिन Prohibition of Child Marriage Act , 2006 (PCMA) PCMA का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना है। इसके तहत बाल विवाह को अमान्य बनाने और बाल विवाह कराने, उसमें मदद करने या उसे बढ़ावा देने के लिए दंडात्मक प्रावधान मौजूद हैंMuslim Polygamy Ban Petition: मुस्लिमों के बहुविवाह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महिलाओं के समान अधिकार पर बड़ी बहस
उम्र साबित करना POCSO मामले में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- मुख्य बात यह भी है कि POCSO का लागू होना कई मामलों में पीड़ित की उम्र पर निर्भर करता है।
- यदि घटना के समय व्यक्ति 18 वर्ष से कम था, तो वह POCSO के तहत बच्या ही है, उसे नाबालिग ही माना जाएगा।
- इसलिए किसी POCSO मामले में केवल लड़की की शादी हो चुकी थी, कहना पर्याप्त कानूनी बचाव नहीं है।
- अदालत को घटना के समय उसकी वास्तविक उम्र और आरोपों से संबंधित अन्य साक्ष्यों को भी देखना होता है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की देरी के बाद 3‑महीने की सीमा तोड़ते हुए आदेश सुनाया
- साइंस‑आधारित जांच व निजता: सुप्रीम कोर्ट ने किया जरूरी संतुलन पर ज़ोर
- शिवसेना पार्षद के डॉक्टर पर हमले के जमानत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए, सड़कों पर ऐसे लोगों का हक नहीं
- छह महीने से अधिक आरक्षित फैसले पर पुनः सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को आवेदन का अधिकार
- 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत: पेंडिंग ट्रैफिक चालानों का आसान निपटारा और बड़ी छूट
- सुप्रीम कोर्ट ने नगा उग्रवादी होपेसन निंगशेन की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर, अपील तक दिल्ली से बाहर न जाने की शर्त लगाई
- सच्चाई की तलाश में: सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल बाद दुष्कर्म के दोषी को रिहा किया
- हाईकोर्ट ने कहा: क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी मजिस्ट्रेट सीधे तलब कर सकते हैं

