होमवकीलसुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस की जीत को मान्यता दी, भगवती डेवलपर्स की अपील को खारिज; तीन दशक पुराना कॉरपोरेट झगड़ा समाप्त
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सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस की जीत को मान्यता दी, भगवती डेवलपर्स की अपील को खारिज; तीन दशक पुराना कॉरपोरेट झगड़ा समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस जनरल फाइनेंस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भगवती डेवलपर्स की अपील को ठुकरा दिया, जिससे 1991 से चल रहा शेयर लेन‑देन से जुड़ा विवाद समाप्त हुआ। अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा और सभी वित्तीय अनियमितता के आरोपों को खारिज कर दिया, जिससे कंपनी को आगे बढ़ने की स्पष्ट राह मिली।

8 सितंबर 2026 को 08:31 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस की जीत को मान्यता दी, भगवती डेवलपर्स की अपील को खारिज; तीन दशक पुराना कॉरपोरेट झगड़ा समाप्त

सौजन्य से:- Jagran

सुप्रीम कोर्ट में पीयरलेस की बड़ी जीत, भगवती डेवलपर्स की अर्जी खारिज; तीन दशक पुराना विवाद खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भगवती डेवलपर्स की अपील खारिज कर दी है।

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भगवती डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल) की अपील को खारिज कर दिया है।

इसके साथ ही देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले कारपोरेट विवादों में से एक का आधिकारिक अंत हो गया है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने नेशनल कंपनी ला अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के 16 अप्रैल के आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 1991 में शुरू हुई कानूनी कार्यवाही से जुड़ा है, जो 1987-88 के दौरान पीयरलेस द्वारा किए गए शेयर लेन-देन और कारपोरेट निर्णयों पर आधारित था। इस विवाद की मुख्य जड़ पीयरलेस द्वारा प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिये जारी किए गए 30 हजार इक्विटी शेयर और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 15,626 शेयरों का हस्तांतरण था।

इन लेन-देन को इस आरोप के साथ चुनौती दी गई थी कि इनका उद्देश्य कंपनी के नियंत्रण को बदलना था और इनमें धन के अनुचित उपयोग या रूटिंग का मामला शामिल था।

मूल कार्यवाही कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 397 और 398 के तहत शुरू की गई थी, जिसे बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से होते हुए एनसीएलएटी तक पहुंचाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पीयरलेस के पक्ष में दिया फैसला

एनसीएलटी ने 18 जुलाई 2022 को अपने आदेश में कंपनी याचिका को स्वीकार कर लिया था। इसके खिलाफ पीयरलेस ने एनसीएलएटी का रुख किया था।

16 अप्रैल, 2026 को एनसीएलएटी ने पीयरलेस की अपील को मंजूर करते हुए एनसीएलटी के फैसले को रद कर दिया और वित्तीय अनियमितता के सभी आरोपों को खारिज कर दिया।

इसके खिलाफ बीडीपीएल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। पीयरलेस का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने रखा, जबकि बीडीपीएल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने किया।

एनसीएलएटी के आदेश को SC ने बरकरार रखा

इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जयंत राय ने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय के बाद इस फैसले ने पीयरलेस के इतिहास के एक लंबे अध्याय को समाप्त कर दिया है।

उन्होंने कहा कि यह कानूनी लड़ाई के अंत से कहीं अधिक है, जो अब कंपनी को पूरी तरह से आगे देखने की अनुमति देता है। इस निर्णय से कंपनी के पक्ष में स्पष्टता आई है और यह साबित हुआ है कि सभी कारपोरेट निर्णय कानूनी और पारदर्शी तरीके से लिए गए थे।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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