सुप्रीम कोर्ट ने मांगी कानूनी शिक्षा के लिए विशेष निकाय की स्थापना
सुप्रीम कोर्ट ने लॉ पाठ्यक्रम के सिलेबस और अवधि की समीक्षा हेतु एक विशेषज्ञ निकाय बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, इसे ‘महत्वपूर्ण मुद्दा’ बताते हुए सरकार से कार्रवाई माँगी। याचिका के अनुसार बीए‑एलएलबी और बीबीए‑एलएलबी जैसी पाँच साल की डिग्री कोर्स समय और आर्थिक भार के कारण अत्यधिक लंबा है, इसलिए इसे पुनः देखना जरूरी है।

सौजन्य से:- Hindustan
कानूनी शिक्षा के लिए विशेषज्ञ निकाय की जरूरत- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी शिक्षा के लिए एक ‘विशेषज्ञ निकाय’ की आवश्यकता को ज़ोर दिया। कोर्ट ने लॉ पाठ्यक्रम के सिलेबस और अवधि की समीक्षा के लिए एक शिक्षा आयोग बनाने की मांग की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है और भारत सरकार को इसे संबोधित करना चाहिए।
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश में कानूनी शिक्षा के लिए एक ‘विशेषज्ञ निकाय’ की जरूरत पर बल दिया। शीर्ष अदालत ने लॉ पाठ्यक्रम के सिलेबस और अवधि की समीक्षा के लिए एक शिक्षा आयोग बनाने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दे को ‘महत्वपूर्ण’ बताया। पीठ ने कहा कि ‘यह विशेषज्ञ निकाय का दौर है और कानूनी शिक्षा के लिए भी एक विशेषज्ञ निकाय होनी चाहिए।’ मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसमें भारत सरकार की अहम भूमिका है।
उन्हें इस पर कुछ कदम उठाने चाहिए।’ शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में नई शिक्षा नीति 2020 सभी प्रोफेशनल और एकेडमिक कोर्स में चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम बढ़ावा देती है, लेकिन भारतीय विधिज्ञ परिषद एलएलबी और एलएलएम कोर्स के मौजूदा सिलेबस, करिकुलम और अवधि की समीक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बीए-एलएलबी और बीबीए-एलएलबी कोर्स की पांच साल की अवधि ‘कोर्स मटीरियल के हिसाब से बहुत अधिक है और इतनी लंबी अवधि से छात्रों और उनके परिवारों पर बहुत अधिक आर्थिक बोझ पड़ता है।
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