'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज - jammu nia court terror accused mothers property cant be attached
'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज जम्मू की एनआईए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो संपत्ति आरोपी की नहीं है, उसे यूएपीए के तहत अटैच नहीं किया जा सकता। HighLights - एनआ…

सौजन्य से:- Jagran
'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज
जम्मू की एनआईए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो संपत्ति आरोपी की नहीं है, उसे यूएपीए के तहत अटैच नहीं किया जा सकता।
HighLights
- एनआईए कोर्ट ने संपत्ति अटैचमेंट अर्जी खारिज की।
- आरोपी की मां के नाम संपत्ति अटैच नहीं होगी।
- यूएपीए धारा 33 के तहत कोर्ट का फैसला।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू की एनआइए कोर्ट ने संपत्ति अटैचमेंट को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जो संपत्ति आरोपित की है ही नहीं, उसे यूएपीए की धारा 33 के तहत अटैच नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने श्रीनगर के शाला कदल आतंकी मामले में आरोपित अरहान रसूल डार उर्फ टोटा की मां के नाम दर्ज मकान को अटैच करने की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट ने श्रीनगर के एस्टेट जूनीमार में सर्वे नंबर 2029 स्थित छह मरला 116 वर्ग फुट के मकान की अटैचमेंट की मांग वाली एनआइए की अर्जी को खारिज किया। यह मामला श्रीनगर के शहीदगंज थाने में दर्ज उस केस से जुड़ा है जिसमें शाला कदल इलाके में दो गैर-स्थानीय लोगों की हत्या की जांच की गई थी।
एनआइए ने दलील दी थी कि हालांकि मकान आरोपित की मां के नाम पर दर्ज है लेकिन कथित तौर पर इसका इस्तेमाल हमले की योजना बनाने और वारदात में इस्तेमाल हथियार को रखने के लिए किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार अरहान रसूल डार ने कथित तौर पर हथियार उक्त मकान में रखा था और हरे-सुनहरे रंग की चटाई पर रखे हथियार की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींचकर सह-आरोपित आदिल मंजूर लंगू को भेजी थी।
बाद में डार के घर से वही चटाई बरामद किए जाने का दावा किया गया। एनआइए ने यह भी बताया कि तस्वीर भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन डार से बरामद हुआ था जबकि हथियार सह-आरोपित लंगू के घर से बरामद किए गए। एनआइए ने तर्क दिया कि संपत्ति का गैरकानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया था।
हालांकि कोर्ट ने यूएपीए के प्रविधानों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित व्यक्ति के मुकदमे के दौरान कोर्ट आरोपित की चल या अचल संपत्ति को अटैच करने का आदेश दे सकता है। रिकार्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि संबंधित मकान अरहान रसूल डार का है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की देरी के बाद 3‑महीने की सीमा तोड़ते हुए आदेश सुनाया
- साइंस‑आधारित जांच व निजता: सुप्रीम कोर्ट ने किया जरूरी संतुलन पर ज़ोर
- शिवसेना पार्षद के डॉक्टर पर हमले के जमानत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए, सड़कों पर ऐसे लोगों का हक नहीं
- छह महीने से अधिक आरक्षित फैसले पर पुनः सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को आवेदन का अधिकार
- 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत: पेंडिंग ट्रैफिक चालानों का आसान निपटारा और बड़ी छूट
- सुप्रीम कोर्ट ने नगा उग्रवादी होपेसन निंगशेन की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर, अपील तक दिल्ली से बाहर न जाने की शर्त लगाई
- सच्चाई की तलाश में: सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल बाद दुष्कर्म के दोषी को रिहा किया
- हाईकोर्ट ने कहा: क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी मजिस्ट्रेट सीधे तलब कर सकते हैं

