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'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज - jammu nia court terror accused mothers property cant be attached

'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज जम्मू की एनआईए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो संपत्ति आरोपी की नहीं है, उसे यूएपीए के तहत अटैच नहीं किया जा सकता। HighLights - एनआ…

25 अगस्त 2026 को 05:55 am बजे
'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज
 - jammu nia court terror accused mothers property cant be attached

सौजन्य से:- Jagran

'आतंकी की मां की संपत्ति को नहीं कर सकते हैं अटैच', जम्मू की अदालत ने NIA की याचिका की खारिज

जम्मू की एनआईए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो संपत्ति आरोपी की नहीं है, उसे यूएपीए के तहत अटैच नहीं किया जा सकता।

HighLights

- एनआईए कोर्ट ने संपत्ति अटैचमेंट अर्जी खारिज की।

- आरोपी की मां के नाम संपत्ति अटैच नहीं होगी।

- यूएपीए धारा 33 के तहत कोर्ट का फैसला।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू की एनआइए कोर्ट ने संपत्ति अटैचमेंट को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जो संपत्ति आरोपित की है ही नहीं, उसे यूएपीए की धारा 33 के तहत अटैच नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने श्रीनगर के शाला कदल आतंकी मामले में आरोपित अरहान रसूल डार उर्फ टोटा की मां के नाम दर्ज मकान को अटैच करने की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की अर्जी खारिज कर दी।

कोर्ट ने श्रीनगर के एस्टेट जूनीमार में सर्वे नंबर 2029 स्थित छह मरला 116 वर्ग फुट के मकान की अटैचमेंट की मांग वाली एनआइए की अर्जी को खारिज किया। यह मामला श्रीनगर के शहीदगंज थाने में दर्ज उस केस से जुड़ा है जिसमें शाला कदल इलाके में दो गैर-स्थानीय लोगों की हत्या की जांच की गई थी।

एनआइए ने दलील दी थी कि हालांकि मकान आरोपित की मां के नाम पर दर्ज है लेकिन कथित तौर पर इसका इस्तेमाल हमले की योजना बनाने और वारदात में इस्तेमाल हथियार को रखने के लिए किया गया था।

जांच एजेंसी के अनुसार अरहान रसूल डार ने कथित तौर पर हथियार उक्त मकान में रखा था और हरे-सुनहरे रंग की चटाई पर रखे हथियार की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींचकर सह-आरोपित आदिल मंजूर लंगू को भेजी थी।

बाद में डार के घर से वही चटाई बरामद किए जाने का दावा किया गया। एनआइए ने यह भी बताया कि तस्वीर भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन डार से बरामद हुआ था जबकि हथियार सह-आरोपित लंगू के घर से बरामद किए गए। एनआइए ने तर्क दिया कि संपत्ति का गैरकानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया था।

हालांकि कोर्ट ने यूएपीए के प्रविधानों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित व्यक्ति के मुकदमे के दौरान कोर्ट आरोपित की चल या अचल संपत्ति को अटैच करने का आदेश दे सकता है। रिकार्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि संबंधित मकान अरहान रसूल डार का है।

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