सुप्रीम कोर्ट ने विशेष पीठ बनाकर NHAI की बेसहारा पशु आश्रय याचिका पर सुनवाई तय की
सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की विशेष पीठ बनाकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की याचिका पर सुनवाई को सूचीबद्ध किया, जिसमें बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल बनाने के आदेश में बदलाव की मांग है। NHAI ने कहा कि इस कार्य की मुख्य जिम्मेदारी राज्य तथा स्थानीय प्रशासन की है और इसके लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

सौजन्य से:- Jagran
NHAI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बनाएगा विशेष पीठ, बेसहारा पशुओं के आश्रय पर सुनवाई
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट बेसहारा पशु आश्रय आदेश पर एनएचएआई की याचिका सुनेगा।
- एनएचएआई को बेसहारा पशु आश्रय स्थल बनाने का काम सौंपा।
- एनएचएआई ने कहा यह कार्य स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजमार्गों के रखरखाव करने वाले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने का काम सौंप दिया गया था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस असामान्य आदेश में बदलाव की मांग करने वाली एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की एक विशेष पीठ बनाने पर सहमति जताई।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष एनएचएआई की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "यह काम स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन को करना चाहिए। हम इसे पूरे देश में नहीं कर सकते।"
एनएचएआई ने अपनी याचिका में कहा कि बेसहारा पशुओं को हटाने, बाड़े में बंद करने और उनके लिए आश्रय स्थल बनाने की मुख्य कानूनी जिम्मेदारी राज्य के अधिकारियों व स्थानीय निकायों की है। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि आश्रय स्थल बनाने में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से उस पीठ को गठित करने का आग्रह किया जिसने 19 मई को वह फैसला सुनाया था जिसमें असामान्य आदेश दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने इस मामले को विशेष पीठ के सामने सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।
19 मई को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था और इंसानों की जान को खतरा कम करने के लिए रेबीज से पीड़ित, लाइलाज बीमारी वाले, खतरनाक व आक्रामक कुत्तों को यूथेनेशिया की अनुमति दी थी।
पीठ ने राजमार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी से निपटने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की थी, जिसमें समस्या के प्रभावी प्रबंधन को सार्वजनिक सुरक्षा व अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार से जोड़ा गया था।
पीठ ने यह भी कहा था कि एनएचएआई राज्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा मवेशियों व अन्य पशुओं की मौजूदगी से निपटने के लिए एक व्यापक एवं समयबद्ध व्यवस्था बनाएगा और लागू करेगा।
'बेसहारा पशुओं से शहर परेशान, बच्चे चुका रहे कीमत' शीर्षक वाली स्वतः संज्ञान कार्यवाही में दायर नई अर्जी में एनएचएआई ने विशेष रूप से उस आदेश पर स्पष्टीकरण मांगा है जिसके तहत उसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा मवेशियों व अन्य पशुओं से निपटने के लिए एक व्यापक व्यवस्था बनानी और लागू करनी है।
एनएचएआई ने कहा कि इन निर्देशों का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि उस पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर जानवरों के लिए आश्रय स्थल, गौशाला, बाड़े या उनके लिए समर्पित विशेष वाहन रखने की कोई अलग जिम्मेदारी है।
उसने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 और राष्ट्रीय राजमार्गों का नियंत्रण (भूमि एवं यातायात) अधिनियम, 2002 का हवाला देते हुए कहा कि उसका कानूनी काम मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों एवं यातायात से जुड़े कार्यों के विकास, रखरखाव, प्रबंधन एवं नियमन से संबंधित है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा की स्थायी समिति ने 2027 के विधायी कार्यक्रम को मंजूरी दी, निरीक्षण कानून सहित 23 विधायी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगी

विद्युत कानून संशोधन पर राष्ट्रीय सभा की स्थायी समिति की विस्तृत राय

ऊतक‑अंग दान के विस्तार और दाता सुरक्षा को सुदृढ़ करने का नया विधायी मसौदा

सुप्रीम कोर्ट ने बनायी विशेष पीठ, NHAI की गाय‑पालन आदेश को चुनौती

शिक्षा मंत्री ने नई विधायी उपलब्धियों से शिक्षा सुधार में नई दिशा तय की

राष्ट्रीय सभा की स्थायी समिति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तीन प्रमुख मसौदों पर विचार किया

सांस्कृतिक उद्योग विकास कानून के मसौदे की पहली व्यापक समीक्षा

झांसी में अनुदेशक शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश न मानने पर क्रमिक अनशन जारी रखा
ताज़ा ख़बरें
- सीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का बरगद बताया, विकास‑प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया
- राष्ट्रीय सभा की समिति ने शिक्षा एवं प्रशिक्षण नीतियों पर सुनवाई शुरू की
- TMC नाम व सिंबल पर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट के विकल्प
- प्रधानमंत्री ने 8 प्रमुख मसौदा कानूनों को शीघ्र अंतिम रूप देने का निर्देश दिया
- ममता ने ईसी के प्रतीक प्रतिबंध को चुनौती देते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
- सुप्रीम कोर्ट: पर्यावरणीय न्याय का बरगद, जड़ें सभ्यता में और शाखाएँ भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षा देती हैं
- सुप्रीम कोर्ट के सिफ़ारिश पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीश नियुक्त
- सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के कर्नाटक रेप‑मर्डर केस की दोबारा जांच के लिए नई विशेष जांच टीम बनाकर तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश दिया

