सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के कर्नाटक रेप‑मर्डर केस की दोबारा जांच के लिए नई विशेष जांच टीम बनाकर तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश दिया
पीड़ित छात्रा की माँ की याचिका पर कोर्ट ने कहा कि पहले की जांच ने उसकी अंतरात्मा को झकझोर दिया, इसलिए कर्नाटक सरकार को एक नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) स्थापित करनी होगी, जिसमें पुराने जांच अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाएगा, और तीन महीने में पूरी जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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14 साल पुराने रेप-मर्डर केस में फिर जांच होगी:सुप्रीम कोर्ट बोला-जिस तरह जांच हुई उसने अंतरात्मा को झकझोर दिया; 3 महीने में रिपोर्ट मांगी
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के धर्मस्थला में 17 साल की छात्रा के रेप-मर्डर केस की दोबारा जांच का आदेश दिया। मामला 2012 का है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कर्नाटक सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने और तीन महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले जिस तरह जांच हुई उसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़ित छात्रा की मां की याचिका पर दिया।
SIT में पुराने जांच अधिकारियों नहीं रखने का आदेश
- कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक सरकार आधुनिक जांच तकनीक के इस्तेमाल में माहिर और अफसरों की SIT बनाए। टीम का नेतृत्व राज्य का कोई सीनियर पुलिस अफसर करे।
- बेलथंगडी पुलिस स्टेशन, कर्नाटक CID या CBI की पुरानी जांच टीमों का हिस्सा रहे किसी अधिकारी को SIT में शामिल नहीं किया जाएगा।
- बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, उसे अपराध करने में अक्षम माना गया। इससे साफ है कि जांच ऐसे तरीके से हुई, जिससे पीड़ित नाबालिग के साथ अन्याय हुआ।
- कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति पर पहले ही मुकदमा चलाया जा चुका है और जिसे बरी कर दिया गया है, उसकी आगे की जांच नहीं की जाए।
पीड़ित को न्याय दिलाना समाज का कर्तव्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से आरोपी बनाए गए व्यक्ति के साथ हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है। लेकिन बेरहमी से रेप और मर्डर की शिकार नाबालिग के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
अगर समाज ऐसे जघन्य अपराध में सही जांच और असली अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय नहीं देता, तो वह अपना कर्तव्य निभाने में असफल होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता है और जांच एजेंसी उसे दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है, तो पुलिस सीधे उसे नहीं पकड़ सकती। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। पढ़ें पूरी खबर…
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