होमसंविधानसीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का बरगद बताया, विकास‑प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया
संविधान

सीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का बरगद बताया, विकास‑प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कार्यक्रम में कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर्यावरणीय न्याय का वटवृक्ष है और विकास व संरक्षण के बीच तालमेल बनाना अदालतों की मुख्य चुनौती है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सीधे मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं, इसलिए साझा नियमों से प्रकृति की रक्षा करनी आवश्यक है।

20 सितंबर 2026 को 04:04 am बजे
सीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का बरगद बताया, विकास‑प्रकृति के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया

सौजन्य से:- Jagran

'सुप्रीम कोर्ट पर्यावरण न्याय का बरगद, NGT के कार्यक्रम में बोले CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का 'बरगद' बताया। उन्होंने कहा कि विकास और प्रकृति में टकराव नहीं है, बल्कि दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।

HighLights

- संरक्षण और विकास में तालमेल बिठाना अदालतों की मुख्य चुनौती है।

- सुप्रीम कोर्ट पर्यावरणीय न्याय का वटवृक्ष, मौलिक अधिकारों पर प्रभाव।

- जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु साझा नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरण न्याय का बरगद का पेड़ बताया है, जो देश की प्रकृति और पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) की रक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा आयोजित 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जरूरत इस बात की है कि दोनों के बीच एक सही संतुलन बनाकर रखा जाए, ताकि देश का विकास भी हो और प्रकृति सुरक्षित रहे।

संविधान के शब्दों में जान फूंकती है न्यायपालिका- सीजेआई

CJI ने कहा कि हमारे संविधान में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई नियम और प्रावधान दिए गए हैं, लेकिन संविधान के शब्द केवल 'बीज' की तरह होते हैं। उन बीजों को पेड़ बनने और फलने-फूलने के लिए न्यायिक ज्ञान और समझ रूपी पानी की जरूरत होती है और सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा वही देखभाल और पोषण का काम किया है।

अदालतों के सामने संरक्षण व विकास के बीच तालमेल की चुनौती- सीजेआई

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि अदालतों के सामने अब यह सवाल नहीं है कि संरक्षण या विकास में से किसे चुना जाए। असली चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच तालमेल कैसे बिठाया जाए। दोनों को एक साथ कैसे कायम रखा जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरणीय न्याय का वटवृक्ष बताया।

विज्ञान भवन में पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मुस्तैदी से होना चाहिए। लेकिन, इतना व्यावहारिक और समझदार भी होना चाहिए कि वह वास्तविक दुनिया की जरूरतों के साथ तालमेल बिठा सके। उन्होंने जोर दिया कि अब आंदोलन पर्यावरण अधिकारों से बढ़कर जलवायु अधिकारों की तरफ बढ़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव नागरिकों के समानता, आजीविका व स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकारों को सीधे प्रभावित करते हैं। सीजेआई ने कहा कि कोई भी देश अकेले जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से नहीं निपट सकता। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग व पर्यावरण नुकसान से बचाने के लिए साझा नियमों की आवश्यकता है।

इस मौके पर अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी और एनटीजी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने भी अपनी बात रखी। वहीं एनजीटी ने अपना मोबाइल एप भी लांच किया।

पीटीआई के अनुसार, सीजेआई ने कहा कि नदी प्रशासनिक सीमाओं के हिसाब से प्रदूषण का सामना नहीं करती। जंगल एक परियोजना और दूसरी परियोजना के बीच का फर्क नहीं समझता। वायुमंडल राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं पहचानता। इसलिए, जलवायु से जुड़े मामलों में फैसला करते समय सिर्फ उस परियोजना पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उस बड़े पारिस्थितिकीय तंत्र को भी देखना चाहिए, जिसका वह परियोजना एक हिस्सा है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा की समिति ने शिक्षा एवं प्रशिक्षण नीतियों पर सुनवाई शुरू की
संविधान

राष्ट्रीय सभा की समिति ने शिक्षा एवं प्रशिक्षण नीतियों पर सुनवाई शुरू की

TMC नाम व सिंबल पर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट के विकल्प
संविधान

TMC नाम व सिंबल पर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट के विकल्प

प्रधानमंत्री ने 8 प्रमुख मसौदा कानूनों को शीघ्र अंतिम रूप देने का निर्देश दिया
संविधान

प्रधानमंत्री ने 8 प्रमुख मसौदा कानूनों को शीघ्र अंतिम रूप देने का निर्देश दिया

ममता ने ईसी के प्रतीक प्रतिबंध को चुनौती देते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
संविधान

ममता ने ईसी के प्रतीक प्रतिबंध को चुनौती देते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट: पर्यावरणीय न्याय का बरगद, जड़ें सभ्यता में और शाखाएँ भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षा देती हैं
संविधान

सुप्रीम कोर्ट: पर्यावरणीय न्याय का बरगद, जड़ें सभ्यता में और शाखाएँ भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षा देती हैं

सुप्रीम कोर्ट के सिफ़ारिश पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीश नियुक्त
संविधान

सुप्रीम कोर्ट के सिफ़ारिश पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीश नियुक्त

ममता बनर्जी की फोकस्ड लड़ाई: ECI के प्रतीक प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
संविधान

ममता बनर्जी की फोकस्ड लड़ाई: ECI के प्रतीक प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर केंद्र ने चार हाईकोर्ट में 14 जजों की नियुक्ति की
संविधान

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर केंद्र ने चार हाईकोर्ट में 14 जजों की नियुक्ति की

ताज़ा ख़बरें