अलीगंज आग के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसआईटी रिपोर्ट खुली, अवैध निर्माण पर गहरी जाँच
15 लोगों की मृत्यु के बाद अलीगंज में सुप्रीम कोर्ट ने 51 अवैध भवनों का निरीक्षण कर एसआईटी रिपोर्ट प्रस्तुत की, पर जिम्मेदार अधिकारियों का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ। आज की सुनवाई में यह रिपोर्ट खुली और अवैध निर्माण पर गहन जाँच के साथ-साथ दिल्ली के पीजी भवन ढहने जैसी अन्य सुरक्षा संबंधित मामलों को भी संबोधित किया जाएगा।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6ab19f2ab2845cc84c0bd92a","slug":"aliganj-fire-incident-sit-report-to-be-opened-in-supreme-court-today-lucknow-news-c-13-lko1096-1930564-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगंज अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट में आज खुलेगी एसआईटी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगंज अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट में आज खुलेगी एसआईटी रिपोर्ट
विज्ञापन
लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान घटना की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट भी कोर्ट के सामनो रखी जाएगी। अगस्त में हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक शासन की ओर से यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि जांच में किन अफसरों और इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की गई है।
22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी में आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलीगंज में अवैध निर्माणों की स्थिति की पड़ताल के लिए टीम भेजी थी। टीम ने पांच और छह सितंबर को शहर में सर्वे किया। इस दौरान अलीगंज में चिह्नित 51 अवैध इमारतों के अलावा गोमतीनगर क्षेत्र की कुछ इमारतों का भी मौके पर निरीक्षण किया गया। टीम की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई है। उसी के आधार पर अब सुनवाई होगी।
अलीगंज अग्निकांड से जुड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ जोड़ी गई है। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन ढहने की घटना के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण से जुड़े मामलों को भी इस सुनवाई के दायरे में लाया गया है।
विज्ञापन
प्रारंभिक जांच में 17 अफसर-इंजीनियर पाए गए थे दोषी
अग्निकांड के बाद एलडीए की प्रारंभिक जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ प्रवर्तन जोन-चार में तैनात पांच जोनल अफसरों, छह सहायक अभियंताओं और छह अवर अभियंताओं की लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। इनमें अधिशासी अभियंता अवनींद्र सिंह, बीपी मौर्या, पीसी पांडेय और आनंद मिश्रा, सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आरएस सिंह, अनिल कुमार और संजय शुक्ला तथा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पांडेय, अंबरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला और हेमंत कुमार के नाम शामिल बताए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में संजय शुक्ला और प्रमोद पांडेय समेत कुछ इंजीनियर निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट से स्थगन आदेश हासिल कर चुके हैं।
इसलिए हुई थी कार्रवाई
जांच में सामने आया था कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, जबकि मौके पर निर्माण व्यावसायिक उपयोग के अनुरूप किया गया। अवैध निर्माण के खिलाफ 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने निरस्त कर दिया था।
जांच के अनुसार, उस समय भवन का निर्माण प्लिंथ स्तर तक ही हुआ था। भवन मालिक की ओर से आवासीय निर्माण का शपथपत्र दिए जाने के आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश वापस लिया गया। इसके बाद निर्माण किस तरह आगे बढ़ा, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की गई।
बाद में बेसमेंट के साथ तीन मंजिला भवन खड़ा हो गया और उसमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। इसके बावजूद एलडीए के स्तर से समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। अग्निकांड के बाद हुई जांच में अवैध निर्माण और विभागीय लापरवाही से जुड़े ये तथ्य सामने आए।
विज्ञापन
22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी में आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलीगंज में अवैध निर्माणों की स्थिति की पड़ताल के लिए टीम भेजी थी। टीम ने पांच और छह सितंबर को शहर में सर्वे किया। इस दौरान अलीगंज में चिह्नित 51 अवैध इमारतों के अलावा गोमतीनगर क्षेत्र की कुछ इमारतों का भी मौके पर निरीक्षण किया गया। टीम की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई है। उसी के आधार पर अब सुनवाई होगी।
विज्ञापन
अलीगंज अग्निकांड से जुड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ जोड़ी गई है। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन ढहने की घटना के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण से जुड़े मामलों को भी इस सुनवाई के दायरे में लाया गया है।
विज्ञापन
प्रारंभिक जांच में 17 अफसर-इंजीनियर पाए गए थे दोषी
अग्निकांड के बाद एलडीए की प्रारंभिक जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ प्रवर्तन जोन-चार में तैनात पांच जोनल अफसरों, छह सहायक अभियंताओं और छह अवर अभियंताओं की लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। इनमें अधिशासी अभियंता अवनींद्र सिंह, बीपी मौर्या, पीसी पांडेय और आनंद मिश्रा, सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आरएस सिंह, अनिल कुमार और संजय शुक्ला तथा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पांडेय, अंबरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला और हेमंत कुमार के नाम शामिल बताए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में संजय शुक्ला और प्रमोद पांडेय समेत कुछ इंजीनियर निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट से स्थगन आदेश हासिल कर चुके हैं।
इसलिए हुई थी कार्रवाई
जांच में सामने आया था कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, जबकि मौके पर निर्माण व्यावसायिक उपयोग के अनुरूप किया गया। अवैध निर्माण के खिलाफ 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने निरस्त कर दिया था।
जांच के अनुसार, उस समय भवन का निर्माण प्लिंथ स्तर तक ही हुआ था। भवन मालिक की ओर से आवासीय निर्माण का शपथपत्र दिए जाने के आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश वापस लिया गया। इसके बाद निर्माण किस तरह आगे बढ़ा, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की गई।
बाद में बेसमेंट के साथ तीन मंजिला भवन खड़ा हो गया और उसमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। इसके बावजूद एलडीए के स्तर से समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। अग्निकांड के बाद हुई जांच में अवैध निर्माण और विभागीय लापरवाही से जुड़े ये तथ्य सामने आए।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जांच पर न्यायालय के हस्तक्षेप पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के कर्नाटक रेप‑मर्डर केस की दोबारा जांच के लिए नई विशेष जांच टीम बनाकर तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने CGPSC भर्ती घोटाले में पूर्व सचिव की जमानत याचिका पर CBI को 3‑सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी किया

आगरा में सराफ की दुकान के 1.80 लाख की अवैध वसूली पर एसएसआई और दरोगा के विरुद्ध FIR की माँग

अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इंटर्फ़ेथ समलैंगिक युगल को रहने का मौलिक अधिकार मान्यता दी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नायरा एनर्जी के लिए SAP से सॉफ्टवेयर सेवाओं की बहाली का आदेश दिया

अयोध्या की अदालत में सुनील डांसर की जमानत अर्जी खारिज, हत्या‑अपहरण के मामले में कड़ी कार्रवाई

बरेली की पंचायत ने नाबालिग दुष्कर्म मामले में शादी‑गोद भराई का समझौता, कानूनी प्रक्रिया को बायपास किया
ताज़ा ख़बरें
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 5‑दिन की अवैध हिरासत पर ₹50,000 मुआवजे का आदेश दिया, पुलिस की ईमानदार त्रुटि स्वीकारोक्ति की सराहना की
- बिना लिखित कारण के गिरफ्तारी अब होगी असंवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश
- बरवाअड्डा में MLA जयराम महतो को मिली अग्रिम जमानत, अदालत ने लगाई कड़ी शर्तें
- कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने चुनाव से पहले जेल से रिहाई हेतु हाई कोर्ट में दायर की याचिका
- गिरफ्तारी के कारण न बताए जाने पर दोबारा अरेस्ट में मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया: बिना सूचना व वकील के अधिकार की उपेक्षा पर तुरन्त रिहाई
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: मुकदमा शुरू होने के बाद किसी भी मुद्दे को प्रारम्भिक रूप से नहीं सुना जा सकता
- ट्रम्प की 100% टैरिफ योजना: कब, कितनी और भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर?

