सुप्रीम कोर्ट ने लिंगभेद को खारिज कर LPG कंपनी को 12 लाख का मुआवजा और फटकार दी
हरियाणा की एक महिला को रिफिलिंग हेल्पर के पद के लिए चयन से बाहर किया गया, जिसे कंपनी ने महिला होने के कारण अनुपयुक्त बताया। उच्च न्यायालय ने कंपनी के फैसले को बरकरार रखा, परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने महिला को 12 लाख का मुआवजा देने और कंपनी को दंडित करने का आदेश दिया, यह निर्णय महिलाओं की गरिमा की सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण माना गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
महिला होने के कारण रोकी नियुक्ति
IOC की ओर से पेश वकील ने कहा कि रिफिलिंग हेल्पर के काम में LPG सिलेंडर उठाना और रात की शिफ्ट में काम करना पड़ता है। संभव है कि इसी वजह से अधिकारियों ने महिला को इस पद के लिए उपयुक्त नहीं माना हो। इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या केवल महिला होने के कारण उनकी नियुक्ति रोकी गई थी।महिला की गरिमा के लिए अपमानजनक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं अपने घरों में रोज गैस सिलेंडर उठाती और बदलती हैं। जब घर में पुरुष मौजूद नहीं होते, तब भी महिलाएं यह काम करती हैं। जस्टिस कुमार ने कहा कि देश में महिलाओं के सम्मान और समानता की बात की जाती है, लेकिन किसी सरकारी उपक्रम की तरफ से इस तरह का व्यवहार महिला की गरिमा के लिए अपमानजनक है।हरियाणा की महिला से जुड़ा है मामला
मामला हरियाणा के गांव गुढ़ा की रहने वाली एक महिला से जुड़ा है। स्थानीय समिति ने डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में IOC के LPG बॉटलिंग प्लांट में रोजगार के लिए 49 लोगों के नामों की सिफारिश की थी। महिला ने रिफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। इसके बाद सूची में शामिल 43 अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए, लेकिन महिला को नौकरी नहीं मिली। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें कैजुअल कर्मचारी, प्रशासनिक पद या चपरासी के पद पर समायोजित करने का निर्देश दिया था।हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली, तो SC पहुंचे
प्रथम अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। उसका कहना था कि महिला का नाम केवल सिफारिश के तौर पर था और उनका चयन नहीं हुआ था। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2025 को प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान IOC ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का अनुरोध भी किया, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। महिला अब सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर चुकी हैं और उन्होंने अपने अधिकार के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपये का मुआवजा देना उचित माना।किरण बेदी पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट तो केंद्र सरकार ने किया विरोध
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