तेजोमहालय मामले में लगातार गैरहाजिरी के कारण पक्षकार बनने की याचिका खारिज
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-2 की अदालत ने कामरेड भजनलाल की याचिका को निरस्त कर दी, क्योंकि उन्होंने और उनके वकील ने कई मौकों पर हाज़िर नहीं हुए। अदालत ने पहले अंतिम अवसर दिया था, पर अनुपस्थिति बनी रही। अगली तारीख 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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तेजोमहालय केस में बड़ा अपडेट: पक्षकार बनने का प्रार्थनापत्र खारिज, लगातार गैरहाजिरी पर अदालत की कार्रवाई
Fri, 18 Sep 2026 10:27 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:27 AM IST
सार
तेजोमहालय केस में पक्षकार बनने के लिए कामरेड भजनलाल की ओर से दाखिल प्रार्थनापत्र को अदालत ने लगातार अनुपस्थिति के चलते खारिज कर दिया। अदालत ने पहले पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया था, लेकिन भजनलाल और उनके अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए।
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विस्तार
श्री भगवान तेजोमहादेव, तेजोलिंग महादेव आदि बनाम सचिव, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार आदि के केस में बृहस्पतिवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-2 की अदालत में सुनवाई हुई। मामले में पक्षकार बनने के लिए दाखिल कामरेड भजनलाल के प्रार्थनापत्र को लगातार अनुपस्थिति होने पर खारिज कर दिया गया। अगली सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर को होगी।
वादी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि कामरेड भजनलाल ने मुकदमे में विपक्षी के रूप में शामिल होने के लिए 10 सीपीसी के तहत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थनापत्र निस्तारण के लिए लंबित था। अदालत ने भजनलाल को पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया था लेकिन वह और उनके अधिवक्ता लगातार अनुपस्थित रहे। इस पर वादी अधिवक्ता ने अदालत से प्रार्थनापत्र खारिज करने की मांग की। अदालत ने स्वीकार कर प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अधिवक्ता मौजूद रहे।
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वादी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि कामरेड भजनलाल ने मुकदमे में विपक्षी के रूप में शामिल होने के लिए 10 सीपीसी के तहत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थनापत्र निस्तारण के लिए लंबित था। अदालत ने भजनलाल को पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया था लेकिन वह और उनके अधिवक्ता लगातार अनुपस्थित रहे। इस पर वादी अधिवक्ता ने अदालत से प्रार्थनापत्र खारिज करने की मांग की। अदालत ने स्वीकार कर प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अधिवक्ता मौजूद रहे।
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