सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘नारीत्व का अपमान’, इंडियन ऑयल को 12 लाख रुपये मुआवजा
1988 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने सुमित्रा नाम की महिला को एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रीफिलिंग हेल्पर की नौकरी देने से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लैंगिक भेदभाव बताया और 12 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
यह तो नारीत्व का अपमान, इंडियन ऑयल पर भड़का सुप्रीम कोर्ट; देना होगा 12 लाख मुआवजा
1988 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक महिला को एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रीफिलिंग हेल्पर की नौकरी देने से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे नारीत्व का अपमान बताया है।
प्रभात कुमार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महज महिला होने के आधार पर एक महिला को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) में नौकरी नहीं दिए जाने को ‘नारीत्व का अपमान’ बताया है। लैंगिक आधार पर योग्य होने के बाद भी एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रीफिलिंग हेल्पर की नौकरी नहीं देने पर इंडियन आयल कार्पोरेशन आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सोच बदलने की जरूरत है।
जस्टिस अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने लैंगिक भेदभाव के चलते योग्य होने के बाद भी नौकरी से वंचित रखने पर इंडियन आयल को याचिकाकर्ता महिला (सुमित्रा) को 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। चूंकि महिला सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच चुकी है, इसलिए यह अदालत उसके साथ हुए भेदभाव के लिए मुआवजा देना बेहतर उचित समझती है। सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने आईओसीएल से कहा आपने सिर्फ इसलिए महिला को नौकरी देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह महिला है? यह नारीत्व का अपमान है। हक के लिए लड़ने वाली को एकमुश्त मुआवज दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की उस मांग को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें इस मामले में आदेश पारित करने के बजाए, मध्यस्थता के लिए भेजने का आग्रह किया था। इस मामले में, याचिकाकर्ता सुमित्रा ( हरियाणा के गुढ़ा गांव की रहने वाली) उन 49 लोगों में शामिल थी, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक स्थानीय समिति ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में नौकरी के लिए की थी। वह कैजुअल खलासी/ प्यून/रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू में शामिल हुई थी, पर नौकरी नहीं दी गई, जबकि 43 अन्य को नियुक्ति पत्र मिले।
आईओसीएल की दलील
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नियुक्ति के लिए नामों की सूची सिर्फ एक सिफारिश थी और यह अनिवार्य नहीं थी। पीठ से कहा कि अधिकारियों को वह उपयुक्त नहीं लगी होगी क्योंकि इस नौकरी में मेहनत की जरूरत होती है। हेल्पर को एलपीजी सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और नाइट शिफ्ट में भी ड्यूटी करनी होती है। इस पर पीठ ने कहा कि आप यह सोचते हैं कि महिला सिलेंडर नहीं उठा सकती? यह सोच बदलें।
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