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हाई कोर्ट ने पूछा दिल्ली पुलिस से—जंतर मंतर पर करणी सेना के प्रदर्शन को पूरी तरह रोकने का कारण क्या?

जंतर मंतर में 20 सितंबर को होने वाले करणी सेना के प्रदर्शन की अनुमति रद्द करने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि पूरी रोक का आधार क्या है और वैकल्पिक स्थल की सम्भावना क्या है। न्यायाधीश ने बताया कि प्रशासन शर्तें लगा कर भीड़ को नियंत्रित कर सकता है, जबकि पुलिस ने सुरक्षा और सोशल मीडिया के प्रभाव को रोक के प्रमुख कारण बताया।

18 सितंबर 2026 को 04:05 am बजे
हाई कोर्ट ने पूछा दिल्ली पुलिस से—जंतर मंतर पर करणी सेना के प्रदर्शन को पूरी तरह रोकने का कारण क्या?

सौजन्य से:- Navbharat Times

जंतर-मंतर पर करणी सेना के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति रद्द करने के दिल्ली पुलिस के फैसले पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

नई दिल्ली: जंतर मंतर पर 20 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति रद्द करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि किसी प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने का आधार क्या है।

भीड़ नियंत्रित करने के विकल्प मौजूद

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि प्रशासन के पास आयोजकों पर जरूरी शर्ते लगाने और भीड़ को नियंत्रित करने के विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में प्रदर्शन को पूरी तरह रोकने के फैसले पर विचार जरूरी है।

क्या था पूरा मामला

मामला करणी सेना के प्रमुख डॉ. राज शेखावत की याचिका से जुड़ा है। वह विवादित UGC रेगुलेशन, 2026 के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते है। पुलिस ने पहले इसकी अनुमति दी थी, लेकिन 15 सितंबर को अनुमति रद्द कर दी। पुलिस ने आशंका जताई कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को मिल रहे व्यापक समर्थन के कारण तय क्षमता से ज्यादा भीड़ जुट सकती है।

हाई कोर्ट ने पुलिस से पूछा सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर प्रशासन को भीड़ बढ़ने की आशंका है तो वह आयोजकों पर पाबंदियां और शर्ते लगा सकता है।प्रस्तावित प्रदर्शन एक तय स्थान पर कुछ घंटों के लिए होना है और प्रदर्शनकारियों के वहां से आगे बढ़ने की योजना नहीं है। ऐसे में इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने पुलिस से यह भी पूछा कि अगर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती तो कोई वैकल्पिक जगह बताई जा सकती है या नहीं।

दिल्ली पुलिस के वकील ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष

दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा ने अनुमति रद्द करने का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जंतर मंतर संवेदनशील हाई-सिक्योरिटी एरिया है और वहां सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों और पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर का पालन जरूरी है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के प्रचार को भी आधार बनाया।

लेखक के बारे मेंदीपांशुदीपांशु वर्तमान में 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में कंसल्टेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन और आईआईएमसी (IIMC) दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। मीडिया इंडस्ट्री में एक साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपांशु ने अपने करियर की शुरुआत साल 2025 में 'NDTV इंडिया' से की थी।उन्हें डिजिटल न्यूज रूम की तेज रफ्तार और ब्रेकिंग न्यूज कल्चर की अच्छी समझ है। दीपांशु की मुख्य रुचि राजनीति और क्राइम खबरों में है। वह बिहार चुनाव 2025, बजट 2026 और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर कर चुके हैं। इसके अलावा वह यूटिलिटी, लोकल, जंगल न्यूज और गुड न्यूज जैसी खबरों पर भी लगातार काम करते हैं।सोशल मीडिया और गूगल ट्रेंड्स पर उनकी खास नजर रहती है। वह इंटरनेट पर वायरल हो रहे मुद्दों और पाठकों की पसंद को समझकर खबरों को बहुत सरल, सटीक और असरदार तरीके से पेश करते हैं।... और पढ़ें

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