हाथी कॉरिडोर की रक्षा में कर्नाटक हाई कोर्ट ने 1,938 एकड़ की भूमि अधिग्रहण रद्द की
कोर्ट ने सूर्यनगर आवासीय परियोजना के तहत किए जा रहे बड़े पैमाने के अधिग्रहण को रोकते हुए बताया कि हाथी मार्ग केवल आवागमन नहीं, बल्कि उनका प्राकृतिक आवास और अस्तित्व का अहम हिस्सा हैं। इस निर्णय में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण को विकास से ऊपर रखकर, बैनरिकटा नेशनल पार्क के निकट इस क्षेत्र में निर्माण के संभावित नुकसान को उजागर किया गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाथियों के रास्ते में आ रही सूर्यनगर परियोजना पर रोक लगाते हुए 1,938 एकड़ भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि हाथी कॉरिडोर सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि उनके घर और जीवन का अहम हिस्सा हैं।
नई दिल्ली: कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के अधिकार को अहम मानते हुए कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड (KHB) की सूर्यनगर चौथे चरण की आवासीय परियोजना के लिए करीब 1,938 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी।
कोर्ट ने कहा कि हाथियों के गलियारे केवल आने-जाने के रास्ते नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और अस्तित्व का जरूरी हिस्सा हैं।
उन्हें ऐसे कब्जाधारी नहीं माना जा सकता, जिनके घरों को जब चाहे विस्थापित कर दिया जाए।
जस्टिस डीके सिंह और एच. शांति भूषण की खंडपीठ ने भूमि मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि सस्ती और सुनियोजित आवासीय कॉलोनी जरूरी है, लेकिन विकास में पर्यावरण और वन्यजीवों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
परियोजना से कराडिक्कल-मादेश्वरा हाथी कॉरिडोर पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
हाथियों के कॉरिडोर पर असर का खतरा
कोर्ट ने यह भी माना कि यह इलाका बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क के आसपास के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा है और यहां बड़े पैमाने पर निर्माण से हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आने-जाने के रास्ते प्रभावित हो सकते हैं। वन विभाग ने भी इस परियोजना से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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