छपरा में किशोर न्याय व बाल कल्याण कानूनों पर पुलिस और हितधारकों को प्रशिक्षित किया
छपरा में एक दिवसीय कार्यशाला में पुलिसकर्मी, न्यायिक अधिकारी और बाल कल्याण हितधारक किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो और अन्य बाल संरक्षण प्रावधानों पर चर्चा कर रहे थे। कार्यक्रम में बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया, तथा अधिकारियों ने बच्चों को अनावश्यक पर्यवेक्षण गृह भेजने के बजाय माता‑पिता की देखरेख में रखने पर बल दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
बाल हितों से जुड़े कानूनों पर पुलिसकर्मियों और हितधारकों को दिया प्रशिक्षण
बच्चों के अधिकारों और पुनर्वास पर कार्यशाला का आयोजन छपरा में हुआ। इस में न्यायिक अधिकारियों और विभिन्न बाल कल्याण हितधारकों ने भाग लिया। किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो और अन्य कानूनी प्रावधानों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और उनके पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने और पुनर्वास पर विशेष जोर बच्चे देश के भविष्य हैं फ़ोटो 25 - जिला अतिथि गृह के सभागार में रविवार को आयोजित कार्यशाला में न्यायिक पदाधिकारी व अन्य छपरा, नगर प्रतिनिधि।
कार्यशाला का उद्देश्य
बाल हितों से जुड़े अधिनियमों व कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के लिए रविवार को शाम में एक दिवसीय उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू), सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों, पुलिसकर्मियों तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यशाला में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम, 2015, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम व ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम सहित बाल अधिकारों से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को कानून के प्रावधानों के साथ-साथ बच्चों के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
भविष्य की जिम्मेदारी
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के संयुक्त सचिव ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। सभी हितधारकों को संवेदनशीलता और आपसी समन्वय के साथ बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे से छोटा-मोटा अपराध हो जाने पर उसे अनावश्यक रूप से पर्यवेक्षण गृह भेजने की बजाय कानून के प्रावधानों के अनुरूप माता-पिता की अभिरक्षा में रखने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने बच्चों की आयु निर्धारण की प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा करने, बाल कल्याण तथा पुनर्वास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए और उसके संरक्षण एवं पुनर्वास की जिम्मेदारी सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर निभानी होगी।
थाना अधिकारियों के निर्देश
प्रधान दंडाधिकारी, किशोर न्याय परिषद, सारण ने सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि किशोर को बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करते समय पुलिस की वर्दी में उपस्थित नहीं रहें और बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं मित्रवत व्यवहार करें। डीएसपी सह नोडल पदाधिकारी, एसजेपीयू ने बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को मिशन वात्सल्य पोर्टल नियमित रूप से अपडेट रखने का निर्देश दिया। सहायक निदेशक, बाल संरक्षण इकाई ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया। मौके पर किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन के पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।
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