झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: बिहार का शराबबंदी अधिनियम राज्य में नहीं लागू
बोकारो में पिकअप गाड़ी पर अवैध शराब के 145 कार्टन ले जाने का आरोप लगते ही उसे जब्त किया गया, पर न्यायिक मजिस्ट्रेट और सेशन जज ने बिहार के मद्यनिषेध अधिनियम के आधार पर गाड़ी को मुक्त नहीं किया। गाड़ी मालिक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जहाँ कोर्ट ने बताया कि 2000 के बिहार‑झारखंड विभाजन के बाद बिहार का यह कानून झारखंड में नहीं फैलता, इसलिए पहले की जब्ती में कानूनी त्रुटि है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच पिकअप वाहन के मालिक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह वाहन पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 में जब्त किया गया था। आरोप था कि वाहन के जरिए 750 मिलीलीटर की बोतलों वाली शराब के 145 कार्टन ले जाए जा रहे थे।
मजिस्ट्रेट ने वाहन रिलीज करने से किया था इनकार
पिकअप मालिक ने जब्त वाहन को मुक्त कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट, बोकारो की अदालत में आवेदन दिया था। हालांकि, मजिस्ट्रेट ने आवेदन खारिज कर दिया। अदालत ने इसके पीछे वजह बताई कि वाहन की जब्ती की कार्रवाई शुरू करने के लिए उपायुक्त को अनुरोध भेजा जा चुका है।इसके बाद गाड़ी मालिक ने बोकारो के सेशन जज के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। सेशन जज ने भी याचिका खारिज कर दी। आदेश में बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों पर भरोसा किया गया। सेशन जज ने कहा था कि अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल किया गया वाहन जब्ती के योग्य है और ऐसी संपत्ति के संबंध में आपराधिक अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
गाड़ी के लंबे समय तक जब्त रहने से नुकसान की दलील
सेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ वाहन मालिक ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वाहन की जब्ती की कार्रवाई वास्तव में शुरू ही नहीं हुई है। इसके सात ही याचिकाकर्ता ने कहा कि पिकअप को लंबे समय तक खड़ा रखने से उसके खराब होने की आशंका है। उन्होंने लोन लेकर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पिकअप गाड़ी को खरीदा था।ऐसे में लगातार जब्त रहने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।बिहार के कानून पर भरोसा करना गंभीर कानूनी त्रुटि
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि बोकारो के सेशन जज ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के आधार पर वाहन की जब्ती को सही माना था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 बिहार राज्य का कानून है। इसकी धारा 1(2) के अनुसार यह कानून पूरे बिहार राज्य में लागू होता है।अदालत ने कहा कि वर्ष 2000 में बिहार पुनर्गठन अधिनियम के जरिए बिहार और झारखंड अलग-अलग राज्य बने हैं। इसके बाद बनाए गए बिहार के इस कानून का झारखंड राज्य में विस्तार नहीं है। ऐसे में बोकारो के सेशन जज द्वारा बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों पर भरोसा करना गंभीर कानूनी त्रुटि थी।
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