सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी नगर निकायों को बताया कि वे आवासीय इमारतों के वाणिज्यिक उपयोग की जांच प्राथमिकता से करें। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संपत्ति को सील करने का आदेश दिया गया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई, नगर निकायों को दिए निर्देश
Tue, 22 Sep 2026 06:54 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 22 Sep 2026 06:54 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित संपत्ति को सील किया जाए।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में यह स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उनका इस्तेमाल आवासीय या व्यावसायिक किस उद्देश्य के लिए किया जाना है, उनकी भी जांच की जाए। हालांकि, फिलहाल ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि सभी प्राधिकरण बिना किसी भेदभाव के यह प्रक्रिया पूरी करेंगे। अगर वे चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करते हैं तो अदालत इस मामले को गंभीरता से लेगी।" अदालत ने पहले भी इमारत निर्माण से जुड़े नियमों और भूमि उपयोग संबंधी नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन पर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कई जगह लागू नियमों और मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए निर्माण किए जा रहे हैं। इनमें प्रतिबंधित क्षेत्र भी शामिल हैं।
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चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाकर इसे पूरे देश के स्तर पर देखने का फैसला किया था। पीठ ने कहा था कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां आवासीय कॉलोनियों में घरों और जमीन का अनधिकृत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
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न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में यह स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उनका इस्तेमाल आवासीय या व्यावसायिक किस उद्देश्य के लिए किया जाना है, उनकी भी जांच की जाए। हालांकि, फिलहाल ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि सभी प्राधिकरण बिना किसी भेदभाव के यह प्रक्रिया पूरी करेंगे। अगर वे चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करते हैं तो अदालत इस मामले को गंभीरता से लेगी।" अदालत ने पहले भी इमारत निर्माण से जुड़े नियमों और भूमि उपयोग संबंधी नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन पर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कई जगह लागू नियमों और मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए निर्माण किए जा रहे हैं। इनमें प्रतिबंधित क्षेत्र भी शामिल हैं।
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चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाकर इसे पूरे देश के स्तर पर देखने का फैसला किया था। पीठ ने कहा था कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां आवासीय कॉलोनियों में घरों और जमीन का अनधिकृत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
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