झारखंड हाईकोर्ट ने बिहार के शराबबंदी कानून को लागू न करने का आदेश, जब्त पिकअप को शर्तों के साथ मुक्त
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 केवल बिहार तक सीमित है और झारखंड में उसका प्रयोग नहीं हो सकता। न्यायिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया गया कि वह जांचें कि वाहन की जब्ती प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं; यदि नहीं, तो पिकअप नंबर JH-05-DF-9463 को निर्धारित शर्तों के साथ मालिक को रिहा किया जाए। यह निर्णय बोकारो के पिंड्राजोरा थाना के शराब अवैध ढुलाई मामले से संबंधित है।

सौजन्य से:- etvbharat.com
बिहार का शराबबंदी कानून झारखंड में नहीं चलेगा, हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ वाहन छोड़ने का दिया निर्देश, बोकारो से जुड़ा है मामला
झारखंड हाईकोर्ट ने शराब की कथित अवैध ढुलाई मामले में जब्त वाहन को शर्तों के साथ छोड़ने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट- राजेश कुमार सिंह.
Published : September 22, 2026 at 4:10 PM IST
रांची: झारखंड में शराब की कथित अवैध ढुलाई के मामले में जब्त वाहन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि बिहार में लागू बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 को झारखंड में लागू नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने इस कानून के आधार पर वाहन की जब्ती को सही ठहराने वाले न्यायिक दंडाधिकारी और सत्र न्यायालय, बोकारो के आदेश पर भी सवाल उठाया है.
हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सुनाया फैसला
मामला बोकारो के पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 से जुड़ा है. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बिहार के कानून को झारखंड में लागू किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई. कोर्ट ने कहा कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 बिहार राज्य का कानून है और यह बिहार की सीमा तक ही लागू है.
झारखंड के गठन के बाद बनाए गए इस कानून को झारखंड में लागू नहीं माना जा सकता. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालतों ने वाहन रिलीज करने से इनकार मुख्य रूप से इस आधार पर किया कि उसके खिलाफ जब्ती की कार्यवाही प्रस्तावित है, लेकिन हाईकोर्ट के सामने याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसी कोई कार्यवाही वास्तव में शुरू ही नहीं हुई है.
न्यायिक दंडाधिकारी को हाईकोर्ट का निर्देश
इसके बाद हाईकोर्ट ने बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया कि वह उपायुक्त से रिपोर्ट लेकर यह पता करें कि वाहन के संबंध में जब्ती की कार्यवाही शुरू हुई है या नहीं. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, तो वाहन नंबर JH-05-DF-9463 को कोर्ट की ओर से तय शर्तों के साथ उसके मालिक को रिलीज कर दिया जाए. यह आदेश देते हुए कोर्ट ने क्रिमिनल मिसलेनियस पेटिशन संख्या 2579/2026 का निपटारा कर दिया.
न्यायिक दंडाधिकारी ने क्यों खारिज की थी याचिका
पुलिस ने पूर्वी सिंहभूम के रितेश प्रधान नामक शख्स के एक व्यावसायिक पिकअप वाहन को कथित तौर पर शराब की ढुलाई के आरोप में जब्त किया था. वाहन से 750 एमएल की बोतलों वाले 145 कार्टन बरामद होने की बात सामने आई थी. वाहन मालिक ने इसे रिलीज कराने के लिए न्यायिक दंडाधिकारी, बोकारो की अदालत में आवेदन दिया था, लेकिन 25 मई 2026 को आवेदन खारिज कर दिया गया. अदालत की ओर से वाहन की जब्ती की कार्रवाई शुरू करने के लिए उपायुक्त को भेजे गए अनुरोध का हवाला दिया गया.
सत्र न्यायालय ने क्यों खारिज की थी याचिका
इसके बाद वाहन मालिक ने सत्र न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली और 27 जून 2026 को क्रिमिनल रिवीजन खारिज हो गया. सत्र न्यायालय ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का हवाला देते हुए माना था कि अवैध शराब की ढुलाई में इस्तेमाल वाहन जब्ती की कार्रवाई के दायरे में आता है.
इसके बाद वाहन मालिक ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वाहन को लेकर वास्तव में कोई जब्ती की कार्यवाही शुरू नहीं हुई है. साथ ही, वाहन फाइनेंस पर खरीदा गया है और लंबे समय तक खड़े रहने से उसके खराब होने का खतरा है.
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