लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश
59-वर्षीय धर्मबीर के सड़क दुर्घटना क्लेम का निपटारा लोक अदालत में हुआ और बीमा कंपनी को 60 दिनों में 2.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यदि भुगतान समय पर नहीं हुआ तो 7.5% वार्षिक ब्याज देना होगा।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Faridabad News: लोक अदालत में सुलझा सड़क हादसे का क्लेम, बीमा कंपनी देगी 2.50 लाख रुपये
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फरीदाबाद। सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति के मुआवजे से जुड़े पुराने क्लेम मामले का एमएसीटी की डेली लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से निपटारा हो गया। एडिशनल सेशन जज एवं एमएसीटी सुरेंदर कुमार की अदालत ने बीमा कंपनी को घायल व्यक्ति को 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर उसके बैंक खाते में करना होगा। मामला नौ फरवरी 2023 का है। हसनपुर निवासी और वर्तमान में सेक्टर-57 में रहने वाले 59 वर्षीय धर्मबीर रात करीब 10 बजे सेक्टर-57 के पास मौजूद थे। इसी दौरान कार के चालक प्रेम चंद ने कथित तौर पर लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में धर्मबीर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धर्मबीर ने एमएसीटी अदालत में याचिका दायर कर 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। सोमवार को हुई लोक अदालत में धर्मबीर और कार की बीमा कंपनी के अधिवक्ता के बीच 2.50 लाख रुपये में मामले का निपटारा करने पर सहमति बनी। बीमा कंपनी को 60 दिनों के भीतर राशि सीधे धर्मबीर के बैंक खाते में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। संवाद
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राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर उसके बैंक खाते में करना होगा। मामला नौ फरवरी 2023 का है। हसनपुर निवासी और वर्तमान में सेक्टर-57 में रहने वाले 59 वर्षीय धर्मबीर रात करीब 10 बजे सेक्टर-57 के पास मौजूद थे। इसी दौरान कार के चालक प्रेम चंद ने कथित तौर पर लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में धर्मबीर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धर्मबीर ने एमएसीटी अदालत में याचिका दायर कर 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। सोमवार को हुई लोक अदालत में धर्मबीर और कार की बीमा कंपनी के अधिवक्ता के बीच 2.50 लाख रुपये में मामले का निपटारा करने पर सहमति बनी। बीमा कंपनी को 60 दिनों के भीतर राशि सीधे धर्मबीर के बैंक खाते में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। संवाद
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