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सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने से रोकने का आदेश दिया

न्यायालय ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को लाभ‑उत्पादक संस्थाओं के रूप में नहीं चलाया जा सकता और उन्होंने पिछले पाँच वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड, शुल्क संरचना और गैर‑शैक्षणिक कर्मचारियों के भुगतान की जानकारी देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, केंद्र‑राज्य सरकारों को छह हफ्तों में आवश्यक विवरणों के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

21 सितंबर 2026 को 07:06 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने से रोकने का आदेश दिया

सौजन्य से:- Hindustan

निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने की इजाजत नहीं दे सकते : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने वाली संस्थाओं के रूप में संचालन की अनुमति न देने की बात कही। न्यायालय ने पिछले 5 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, फीस संरचना, और योग्य कर्मचारियों के भुगतान की जानकारी देने का आदेश दिया है। यह आदेश देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने वाली संस्थाओं के तौर पर काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए देशभर के निजी विश्वविद्यालयों को अपने पिछले 5 सालों के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी देने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने इसके अतिरिक्ति निजी विश्ववद्यालयों को इस समय अवधि में धन के इस्तेमाल, फीस का ढांचा, सरप्लस इन्वेस्टमेंट और उन लोगों को किए गए भुगतान की जानकारी भी देने को कहा है जो सीधे तौर पर शैक्षणिक कामों से जुड़े नहीं हैं। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जानकारी लेकर अपने मुख्य सचिवों के जरिए हलफनामा दाखिल करें। पीठ ने इसके लिए 6 सप्ताह का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (17 सितंबर को) पारित अपने आदेश में कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी निजी विश्वविद्याय को मुनाफा कमाने वाली संस्था के तौर पर संचालन की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसका एक मकसद होना चाहिए और साथ ही कुछ फाइनेंशियल कुशन (सुरक्षित फंड) भी होना चाहिए ताकि संस्थान के सुचारू कामकाज के लिए इसके धन /संसाधनों का जिम्मेदारी से प्रबंधन किया जा सके और शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों को उचित वेतन-भत्ता मिल सके।

निजी विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारियां

पीठ ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय जिम्मेदार प्रबंधन और सुचारू कामकाज के लिए उचित वित्तीय सुरक्षा कोष रख सकती हैं, लेकिन उनके संसाधनों को शिक्षा से असंबंधित कामों में नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी नोएडा स्थित एक यूनिवर्सिटी के खिलाफ आयशा जैन की याचिका पर शुरू हुई कार्यवाही के दौरान की है। अब इस मामले का विस्तार देश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के बारे में हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ‘व्यापक जनहित में देशभर में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना, नियमन और उन्हें मिलने वाले लाभों की जांच करना जरूरी है।

जानकारी प्रदान करने के लिए निर्देश

निजी विश्विविद्यालयों को यह जानकारी देना है:

- निजी विश्वविद्यालयों को यह बताना होगा कि उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से क्या लाभ लिए हैं।

- हर कोर्स में छात्रों के प्रवेश के लिए अपनाई गई सही प्रक्रिया भी बतानी होगी।

- दाखिले के समय और ली गई फीस की जानकारी और क्या कोर्स के दौरान किसी भी नाम से कोई लिए जाने वाले फंड आदि की जानकारी देनी होगी।

- सरप्लस फंड का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, जिसमें ऐसे फंड से किए गए इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं, इसकी पूरी जानकारी साफ तौर पर देनी होगी।

- शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों की भर्ती का तरीका, उनके वेतन और दूसरे भत्ते और उन्हें ये कैसे दिए जाते हैं, इसकी भी पूरी जानकारी देनी होगी।

- संबद्ध करने वाली/मान्यता देने वाली संस्था ऐसे विश्वविद्यालयों में किए गए निरीक्षणों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है।

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