सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी के बुनियादी ढाँचे की कमी पर किया कड़ा चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की और केंद्र सरकार को एनसीएलटी अध्यक्ष से परामर्श करके आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की पहचान करने का निर्देश दिया। साथ ही बार एसोसिएशन को सभी क्षेत्रीय पीठों के बुनियादी ढाँचा संबंधी डेटा एक तालिका रूप में इकट्ठा करने का आदेश दिया गया, क्योंकि बिन‑इन्फ्रास्ट्रक्चर के न्यायाधिकरण प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर पाएगा।

सौजन्य से:- Jagran
'बुनियादी ढांचा नहीं होगा तो कैसे काम करेंगे न्यायाधिकरण' : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी में बुनियादी ढांचे की कमी पर चिंता व्यक्त की और केंद्र सरकार को एनसीएलटी अध्यक्ष से परामर्श कर आवश्यक सुविधाओं की पहचान करने का निर्देश दिया।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी के बुनियादी ढांचे पर चिंता जताई
- केंद्र को एनसीएलटी अध्यक्ष से परामर्श कर सुविधाएं पहचानने का निर्देश
- बार एसोसिएशन को क्षेत्रीय पीठों के डेटा जुटाने का आदेश
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर बुनियादी ढांचा ही उपलब्ध नहीं होगा, तो न्यायाधिकरण कैसे काम करेंगे? इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पीठों के लिए तत्काल जरूरी बुनियादी सुविधाओं की पहचान करे और इस संबंध में एनसीएलटी अध्यक्ष से परामर्श करे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एनसीएलटी की बार एसोसिएशन को सभी क्षेत्रीय पीठों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे से जुड़ा आंकड़ा एक तालिका के प्रारूप में जुटाने का भी निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं होगा तो न्यायाधिकरण कैसे काम करेंगे? वे हर दिन हजारों करोड़ रुपये से जुड़े मामलों को देखते हैं...वे सरकार की जीवनरेखा हैं।
शीर्ष अदालत एनसीएलटी में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। एनसीएलटी बार एसोसिएशन ने एक लंबित मामले में अर्जी दायर की है, जिसमें कहा गया है कि सदस्यों की कमी के कारण एनसीएलटी की कम-से-कम 18 पीठ केवल आधे दिन ही बैठ रही हैं।
बार एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि इंसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आइबीसी) लागू होने के बाद एनसीएलटी के अधिकार क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। इसके बावजूद न्यायाधिकरण में स्वीकृत पदों की संख्या अब भी 63 सदस्यों की ही है। याचिका में कहा गया है कि 30 जून, 2026 तक न्यायाधिकरण में अध्यक्ष समेत 26 न्यायिक सदस्य और 25 तकनीकी सदस्य हैं। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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