बारिश में डूबते गुरुग्राम के जल निकासी तंत्र पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में बारिश के समय ड्रेनेज‑सीवेज सिस्टम के ठप पड़ने को बुनियादी बुनियादी ढाँचे में निवेश की कमी के कारण बताया, जबकि ग्रेटर नोएडा का 30‑40 साल का दीर्घकालिक योजना मॉडल अलग है। कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बेंगलुरु अथॉरिटी को चार हफ़्ते में जवाब देने का नोटिस भी जारी किया।

सौजन्य से:- Hindustan
अदालत से:: सही इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से बारिश में डूबता है गुरुग्राम: सुप्रीम कोर्ट
वैकल्पिक हेडिंग बारिश के दौरान गु्रुग्राम में सिस्टम चरमरा जाता है: सुप्रीम कोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर न
वैकल्पिक हेडिंग बारिश के दौरान गु्रुग्राम में सिस्टम चरमरा जाता है: सुप्रीम कोर्ट
इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से बारिश के दौरान गुरुग्राम में सिस्टम हो रहा फेल : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ
- शीर्ष अदालत ने कहा, बेहतर योजना वाले ग्रेटर नोएडा में ऐसी कोई समस्या नहीं
- पीठ ने एक याचिका पर बेंगलुरु अथॉरिटी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा
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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुरुग्राम में बारिश के दौरान ड्रेनेज और सीवेज सिस्टम के फेल होने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा, बारिश के वक्त गुरुग्राम का सिस्टम इसलिए ठप पड़ जाता है, क्योंकि वहां ड्रेनेज-सीवेज सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर (अवसंरचना) बनाने में निवेश नहीं किया गया। ग्रेटर नोएडा का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा, वहां हालात अलग हैं, क्योंकि वहां की कार्ययोजना अगले 30-40 सालों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें राज्य सरकार की प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) स्कीम को सही ठहराया गया था। पीठ ने सिटिजन्स एक्शन फोरम की याचिका पर बेंगलुरु अथॉरिटी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
सीजेआई की टिप्पणी
गुरुग्राम में सिस्टम चरमराते हमने देखा है: सीजेआई
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, टाउनशिप के इंफ्रास्ट्रक्चर या बुनियादी ढांचे में कोई खास सुधार या बढ़ोतरी नहीं दिख रही। ऐसा नहीं है कि नई सड़कें बनी हों, नई सीवर लाइनें बिछाई गई हों, नए फ्लाईओवर बनाए गए हों। हमने गुरुग्राम में देखा है, किसी प्राकृतिक आपदा के आने पर यह सिस्टम कैसे चरमरा जाता है। क्योंकि, बिना इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाए आप प्लॉट के साइज पर कई मंजिलों का बोझ डाल रहे हैं। सीजेआई ने कहा, ग्रेटर नोएडा में ऐसी कोई समस्या नहीं है, क्योंकि वहां अगले 30-40 सालों को ध्यान में रखकर प्लान बनाया गया है।
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