झारखंड DGP नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट को सरकार ने विस्तृत सफ़र बताया
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में 2024‑2025 के दौरान अजय कुमार सिंह के हटने, अनुराग गुप्ता को अस्थायी प्रभारी और नई चयन‑नियुक्ति नियमों के निर्माण सहित पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। इन नियमों के तहत बनी पैनल से अनुराग गुप्ता को नियमित DGP नियुक्त किया गया, उनका स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और तत्पश्चात् तदाशा मिश्रा को कार्यवाहक तथा प्रमोशन द्वारा DGP बनाया गया, साथ ही राज्य में केवल चार ही DG‑रैंक अधिकारी रहने का उल्लेख किया गया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
अजय सिंह की विदाई से अनुराग गुप्ता की वापसी और तदाशा मिश्रा की ताजपोशी तक, सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखा पक्ष
राज्य सरकार ने झारखंड के DGP की नियुक्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट.
Published : September 2, 2026 at 11:39 AM IST
रांची: झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे में तदाशा मिश्रा की डीजीपी नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया और उसके पीछे की परिस्थितियों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति मनमाने तरीके से नहीं हुई, बल्कि राज्य में लागू नियमों और चयन प्रक्रिया के तहत की गई है.
2024 में शुरू हुआ डीजीपी नियुक्ति का घटनाक्रम
सरकार ने हलफनामे में वर्ष 2024 से लेकर तदाशा मिश्रा की नियमित डीजीपी के रूप में नियुक्ति तक का पूरा घटनाक्रम बताया है. इसमें तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह के पद पर बने रहने को लेकर सामने आई स्थिति, विधानसभा चुनाव के दौरान डीजीपी में बदलाव, यूपीएससी से पैनल मिलने में हुई देरी और बाद में राज्य सरकार की ओर से बनाए गए नए नियमों का उल्लेख किया गया है.
सरकार के अनुसार, वर्ष 2024 में तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह ने पद पर बने रहने में अपनी असमर्थता या अनिच्छा जताई थी. इसके बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए डीजीपी पद का अतिरिक्त प्रभार सीआईडी के तत्कालीन डीजी अनुराग गुप्ता को सौंपा गया. उसके बाद नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने यूपीएससी को नया पैनल तैयार करने का प्रस्ताव भी भेजा.
इसी दौरान यूपीएससी ने अजय कुमार सिंह को निर्धारित दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाए जाने के कारणों पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा. इसी के बाद विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई. चुनाव के दौरान आचार संहिता और चुनाव आयोग के निर्देशों के कारण डीजीपी के पद पर फिर बदलाव हुआ. अनुराग गुप्ता को पद के प्रभार से हटाकर अजय कुमार सिंह को चुनाव अवधि तक डीजीपी की जिम्मेदारी दे दी गई. चुनाव समाप्त होने के बाद 28 नवंबर 2024 को अनुराग गुप्ता को फिर से डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया.
यूपीएससी से पैनल नहीं मिला तो राज्य ने बनाए नए नियम
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सितंबर से दिसंबर 2024 के बीच यूपीएससी के साथ लगातार पत्राचार किया गया, लेकिन नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल उपलब्ध नहीं हो सका. इसके बाद राज्य सरकार ने डीजीपी के चयन और नियुक्ति के लिए नए नियम तैयार किए.
Director General of Police and Inspector General of Police, Jharkhand (HoPF) Selection and Appointment Rules, 2025 को जनवरी 2025 में राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिली. इन नियमों के तहत डीजीपी के चयन के लिए छह सदस्यीय चयन/नामांकन समिति बनाई गई. इस समिति में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया गया. इसके अलावा यूपीएससी के नामित अधिकारी, जेपीएससी के नामित अधिकारी, पूर्व डीजीपी, मुख्य सचिव और गृह सचिव को समिति में शामिल किया गया.
समिति ने तीन अधिकारियों का पैनल बनाया
नए नियम लागू होने के बाद 21 जनवरी 2025 को चयन/नामांकन समिति की बैठक हुई. समिति ने डीजी रैंक के तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा. इसी पैनल के आधार पर वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए अनुराग गुप्ता को नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया.
सरकार ने हलफनामे में यह भी बताया है कि बाद में अनुराग गुप्ता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया और 6 नवंबर 2025 से उनकी सेवा समाप्त हो गई. इसके बाद तदाशा मिश्रा को डीजीपी का कार्यवाहक प्रभार सौंपा गया. 12 नवंबर 2025 को उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नत किया गया.
अफसरों की कमी का भी दिया हवाला
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य में डीजी रैंक के अधिकारियों की संख्या का भी उल्लेख किया है. सरकार के अनुसार, उस समय झारखंड कैडर में डीजी रैंक के केवल चार अधिकारी थे, जबकि एडीजी रैंक के आठ अधिकारी थे. इनमें से पांच अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे.
सरकार का कहना है कि ऐसे में राज्य के पास डीजीपी पद के लिए उपलब्ध अधिकारियों की संख्या काफी सीमित थी. इसी परिस्थिति को देखते हुए वर्ष 2025 के नियमों में बदलाव किया गया. नियम 5(सी) में संशोधन के जरिए ऐसे अधिकारियों को भी चयन के दायरे में लाया गया, जिनके पास पुलिस सेवा में कम से कम 30 वर्ष का अनुभव और एडीजी या डीजी स्तर पर काम करने का अनुभव हो.
30 दिसंबर 2025 को हुई थी चयन समिति की बैठक
संशोधित नियमों के तहत 30 दिसंबर 2025 को चयन/नामांकन समिति की बैठक हुई. सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योग्य अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया. समिति की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार ने तदाशा मिश्रा को नियमित डीजीपी यानी डीजीपी (HoPF) नियुक्त करने का निर्णय लिया.
सरकार ने हलफनामे में कहा कि नियुक्ति के समय तदाशा मिश्रा राज्य के चार वरिष्ठतम डीजी रैंक के अधिकारियों में शामिल थीं. इसलिए उनका चयन वरिष्ठता, योग्यता और लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए किया गया.
झारखंड की पहली महिला डीजीपी बनीं तदाशा मिश्रा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि तदाशा मिश्रा झारखंड की पहली महिला डीजीपी हैं. उनके 30 वर्ष से अधिक के पुलिस सेवा अनुभव का भी हलफनामे में उल्लेख किया गया है. सरकार ने बताया कि तदाशा मिश्रा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम किया है. इसके अलावा सीआईडी में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली है. महिला और बाल अपराध, महिला सुरक्षा तथा पुलिसिंग में सुधार के क्षेत्र में उनके काम को भी सरकार ने उनके सेवा रिकॉर्ड का हिस्सा बताते हुए कोर्ट के सामने रखा है.
नक्सल और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का दिया ब्योरा
हलफनामे में सरकार ने तदाशा मिश्रा के कार्यकाल के दौरान राज्य में नक्सल और संगठित अपराध के खिलाफ हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया है. सरकार के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 103 नक्सलियों को गिरफ्तार, 49 नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराया गया है. जबकि 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए या निष्प्रभावी किए गए हैं.
सरकार ने कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर की गिरफ्तारी को भी बड़ी उपलब्धि बताया है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित साफी की गिरफ्तारी, प्रिंस खान गिरोह से जुड़े लोगों पर कार्रवाई और गिरोह के सदस्यों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने का भी उल्लेख किया गया है. हलफनामे में राहुल दुबे गैंग, प्रिंस खान गैंग और देविल्स ग्रुप से जुड़े कई कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई है.
सरकार का तर्क- नियुक्ति में नियमों का पालन हुआ
सुप्रीम कोर्ट में झारखंड सरकार का मुख्य तर्क है कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया फैसला नहीं है. सरकार के अनुसार, उस समय राज्य में डीजी रैंक के अधिकारियों की सीमित उपलब्धता, प्रशासनिक जरूरत, पुलिस व्यवस्था और वर्ष 2025 में बनाए गए नियुक्ति नियमों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.
सरकार ने यह भी बताया है कि डीजीपी की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव यूपीएससी को भेजा गया है. हलफनामे के जरिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को नियुक्ति की पूरी पृष्ठभूमि से अवगत कराते हुए कहा है कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया और लागू नियमों के अनुरूप हुई है.
सरकार ने यह दलील भी दी है कि संवेदनशील पदों पर नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार को अपने अधिकारियों की योग्यता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासनिक निर्णय लेने की भूमिका हासिल है. इसी आधार पर सरकार ने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को नियमसम्मत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा है.
ये भी पढ़ें: गृह विभाग को छोड़ें सीएम, राज्य में स्थाई डीजीपी की जाए तैनात, नहीं तो सरकार के खिलाफ होगा उलगुलान- केएन त्रिपाठी
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