वकीलों की हड़ताल कल: हाईकोर्ट के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को बढ़ाने के हाईकोर्ट प्रशासन के फैसले का कड़ा विरोध किया है. हाईकोर्ट में वकीलों पर काफी असर पड़ने का दावा किया गया है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
दिल्ली की निचली अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वकीलों की हड़ताल कल
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से हाईकोर्ट के वकीलों पर काफी असर पड़ेगा और उनके केसों में 70% कमी होगी.
Published : July 13, 2026 at 8:22 PM IST
|Updated : July 13, 2026 at 8:53 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के वकील जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के हाईकोर्ट प्रशासन के फैसले के खिलाफ कल यानि 14 जुलाई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे. दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की आज हुई आपात बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया. हाईकोर्ट प्रशासन ने दिल्ली के जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है.
दरअसल, पिछले हफ्ते हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने वित्तीय क्षेत्राधिकार पर बनी सात जजों की कमेटी की रिपोर्ट को फुल कोर्ट के समक्ष रखने से रोकने की मांग खारिज कर दिया था. इस कमेटी ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने की सिफारिश की थी जिसे फुल कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी. बता दें कि इसके पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 25 मई को वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था.
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के प्रैक्टिस औऱ उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। इसका न्याय वितरण प्रणाली पर काफी गहरा असर होगा. बता दें कि इसके पहले दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकीलों ने इसी सवाल को लेकर 14 मई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था. जिला अदालतों में न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का आह्वान ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने किया था.
ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर बीस करोड़ करने की मांग की थी. इस मांग पर को-आर्डिनेशन कमेटी की हाईकोर्ट प्रशासन से बात भी हुई थी जिसके बाद उन्होंने 14 मई के बाद आगे न्यायिक कार्यों के बहिष्कार को खत्म कर दिया था. अब इस सवाल पर वकीलों के दोनों संगठन आमने-सामने हैं.
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