अदालत की मध्यस्थता से नाराज पक्षकार
उत्तर प्रदेश में तीन बड़े धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में मध्यस्थता की कोशिश विफल हो गई है। पक्षकार अदालत के फैसले पर जोर दे रहे हैं और मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल नहीं होने का निर्णय लिखा है।

सौजन्य से:- Hindustan
पक्षकारों ने अदालत की मध्यस्थता संबंधी पहल को ठुकराया
उत्तर प्रदेश में ज्ञानवापी, श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल शाही जामा मस्जिद के विवादों का अदालत के बाहर समाधान नहीं हो पाया। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के जरिए विवादों को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्ष अदालत के फैसले पर जोर दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में तीन बड़े धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाई हैं। ज्ञानवापी, श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल शाही जामा मस्जिद मामलों से जुड़े पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि अदालत ही इस मामले का फैसला करे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 'देश भर में मध्यस्थता और विवादों के सामंजस्यपूर्ण समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक्शन' (समाधान समारोह) शुरू किया है। इसका मकसद 21, 22 और 23 अगस्त को होने वाली विशेष लोक अदालत से पहले मध्यस्थता के जरिए लंबित मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने को बढ़ावा देना है।
ज्ञानवापी विवाद
यह मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद 17वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा प्राचीन मंदिर के कुछ हिस्सों को नष्ट करने के बाद बनाई गई थी। जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद औरंगजेब के शासनकाल से पहले की है और यह एक वैध वक्फ संपत्ति है।
मुस्लिम पक्ष
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने कहा कि वह समझौते या मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने को बाध्य नहीं हैं। वह कानूनी ढंग से मसले का हल ढूंढ़ेगी। संयुक्त सचिव एसएस यासीन ने कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद अंजुमन ने प्रस्तावित मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल नहीं होने का निर्णय किया।
हिंदू पक्ष
ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि हिंदू पक्ष चाहता है कि विवाद का फैसला कानूनी आधार पर हो।
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संभल : शाही जामा मस्जिद-हरि हर मंदिर विवाद
संभल का विवाद वाराणसी के मामले जैसा ही है, जहां उस जगह के धार्मिक स्वरूप को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हिंदू याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 16वीं सदी की जामा मस्जिद एक प्राचीन हरि हर मंदिर की जगह पर बनाई गई थी, जबकि मुस्लिम पक्ष इस दावे को गलत बताता है।
मुस्लिम पक्ष
संभल की शाही जामा मस्जिद कमेटी के वकील शकील अहमद वारसी ने कहा कि यह मामला धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा है और इतना संवेदनशील है कि इसे आपसी समझौते से हल नहीं किया जा सकता। यह मंदिर है या मस्जिद, इसका फैसला अदालत को करना चाहिए, न कि आपसी समझौते से।
हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा ने कहा कि उन्हें संभल मामले में मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है।
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मथुरा : श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि मस्जिद उसी जगह पर 17वीं सदी में बनाई गई थी, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।
मुस्लिम पक्ष
शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव और मुस्लिम पक्ष के वकील तनवीर अहमद से टिप्पणी के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष के वकील हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में, इस महीने की शुरुआत में मथुरा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने हुई मध्यस्थता की कार्यवाही तब विफल हो गई जब मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ।
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