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सुप्रीम कोर्ट की पहल: ज्ञानवापी विवाद का समाधान निकल सकता है मध्यस्थता से?

सुप्रीम कोर्ट ने काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पहल की है। इसे लेकर 14 जुलाई को दोनों पक्षों के वादी और अधिवक्ताओं की बैठक बुलाई गई है। अदालत का यह कदम सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने की उम्मीद जगाता है।

13 जुलाई 2026 को 02:14 am बजे
सुप्रीम कोर्ट की पहल: ज्ञानवापी विवाद का समाधान निकल सकता है मध्यस्थता से?

सौजन्य से:- Hindustan

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मस्जिद विवाद समाधान की ओर बढ़ा? सुप्रीम कोर्ट की पहल पर कल बैठक

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने नई पहल की है। हिंदू-मुस्लिम पक्ष को बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने की पहल की है। इसे लेकर मंगलवार को दोनों पक्षों के वादी और अधिवक्ताओं की बैठक बुलाई गई है।

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शीर्ष अदालत ने मामले को सीधे निर्णय देने के बजाय विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) को बातचीत से समाधान निकालने का निर्देश दिया है। इस संबंध में 14 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित केंद्र में मध्यस्थता की तारीख तय की गई है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के वादी और अधिवक्ता शामिल होंगे।

इसके बाद, आगामी 21 से 23 अगस्त तक तीन दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट को पूरी उम्मीद है कि इस बातचीत से कोई न कोई सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा। मामले से जुड़े अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के मध्यस्थता से समाधान के संबंध में जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है। ज्ञानवापी से जुड़ी सात पत्रावलियों के संबंध में नौ जुलाई को सभी पक्षों को सूचना दी गई थी। अब 14 जुलाई को दोनों पक्षों को बुलाया गया है।

अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि तीन महीने तक चले एएसआई सर्वे में मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई है और उनका पक्ष है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ढांचे पर किया गया। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर पक्ष को सौंप दिया जाता है तो वे दूसरे पक्ष पर किसी प्रकार की सजा या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे। हालांकि, यदि समाधान नहीं निकलता है तो मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

दोनों पक्षों का क्या दावा

ज्ञानवापी विवाद में हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद की जगह पर पहले एक प्राचीन और मूल काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने 1669 में इस मंदिर को तुड़वा दिया था और उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था। मुस्लिम पक्ष मंदिर सौंपने के लिए तैयार होता है तो इस मध्यस्थता को सफल माना जाएगा। एसआई सर्वे के दौरान मंदिर से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह भूमि वक्फ बोर्ड की है और यहां सदियों से नमाज पढ़ी जा रही है। अगर सहमति से किसी निष्कर्ष तक पहुंचते हैं। उसके आधार पर अदालत आगे का आदेश पारित कर सकती है।

डेढ़ वर्ष बाद समाधान की ओर बढ़ा ज्ञानवापी केस

वाराणसी। ज्ञानवापी विवाद के समाधान के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में 14 जुलाई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मध्यस्थता केंद्र प्रभारी जज राजीव मुकुल पांडेय की अध्यक्षता में हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की बैठक होने जा रही है। इससे ज्ञानवापी मुकदमे में सरगर्मी बढ़ेगी।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसम्बर 2024 को ज्ञानवापी को लेकर नया मुकदमा दाखिल और स्वीकार करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की तीन मेंबर वाली बेंच ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधानों) 1991 की कुछ धाराओं की वैधता पर सवाल उठाने वाली छह याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

बेंच ने कहा था कि हम इस कानून के दायरे, उसकी शक्तियों और ढांचे को जांच रहे हैं। ऐसे में यही उचित होगा कि बाकी सभी अदालतें अपने हाथ रोक लें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिकाओं पर चार हफ्ते में अपना पक्ष रखने को कहा था। केंद्र के जवाब दाखिल करने तक खंडपीठ ने सुनवाई से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पुराने मुकदमों में सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट से लेकर सेशन कोर्ट की विभिन्न अदालतों में लम्बित ज्ञानवापी के केसों में सुनवाई धीमी पड़ गई। आदेश के दृष्टिगत कई मामलों में अगली सुनवाई कई तिथियों से नहीं हो पा रही है। सुप्रीम कोर्ट की नई पहल के बाद करीब डेढ़ वर्ष बाद समाधान की नई संभावना दिखने लगी है।

मध्यस्थता केंद्र में वादी-प्रतिवादी और अधिवक्ता सहित 30 लोग रहेंगे

मध्यस्थता केंद्र में ज्ञानवापी के चार मुकदमों से जुड़े सभी वादी-प्रतिवादी और अधिवक्ता मौजूद रहेंगे। सुनवाई केंद्र प्रभारी जज की अध्यक्षता में होगी। निगरानी के लिए जिला जज भी शामिल हो सकते हैं।

सभी पक्षकार और अधिवक्ता के हिसाब से तकरीबन 30 से ज्यादा लोग वार्ता में शामिल हो सकते हैं। इनमें वादी सोहनलाल आर्या, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास, शैलेंद्र पाठक व्यास के अलावा वादी अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, जिला प्रशासन की ओर से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र के साथ ही एएसआई और प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और ईएसआई के भी अधिवक्ता के रहने की संभावना है। वहीं, प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया के अधिवक्ताओं ने नोटिस मिलने से इनकार किया है।

मुफ्ती-ए-बनारस मौ. अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। कोर्ट ने अगर ऐसा कहा है तो हमारी कमेटी इस पर बैठकर विचार करेगी। हम लोग आपसी सहमति के बाद ही कुछ कह सकते हैं।

वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के अनुसार मध्यस्थता केंद्र से कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली है। मेरा मुकदमा सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में विचाराधीन है। यह 1991 के ज्ञानवापी के मूलवाद से जुड़ा है। इसमें ज्ञानवापी के धार्मिक स्ट्रक्चर का निर्धारण होना है।

अधिवक्ता एवं पक्षकार मुख्तार अहमद अंसारी इस मामले को विशेष लोक अदालत में नहीं भेजा जाना चाहिए। अगर ऐसा हो रहा है तो यह मुस्लिम समाज पर दबाव बनाना है। जब प्लसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो जल्दीबाजी क्यों? सुप्रीम कोर्ट पहले इस एक्ट का निस्तारण कर दे। फिर, इस तरह की पहल होनी चाहिए।

वाराणसी कोर्ट में 36, हाईकोर्ट में 6 मुकदमा विचाराधीन

आदिविशेश्वर प्राचीन ज्योतिर्लिंग, शृंगार गौरी एवं ज्ञानवापी को लेकर वर्तमान में वाराणसी कोर्ट में 36 मुकदमे लंबित हैं। वहीं हाईकोर्ट में छह केस पर सुनवाई चल रही है।

ज्ञानवापी से संबंधित सबसे अधिक मुकदमों की जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से केवल डेट लग रही है। इसके अलावा सिविल जज सीनियर, सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट, एडीजे की अदालतों में मुकदमा के साथ ही विभिन्न प्रार्थना पत्र लंबित हैं। इनमें जिला जज की अदालत में सबसे महत्वपूर्ण वाद शृंगार गौरी से जुड़ा है। इसमें बंद तहखाना सहित पूर्ण परिसर के सर्वेक्षण की मांग की गई है।

इसके साथ ही सिविल जज सीनियर डिविजन एफटीसी कोर्ट में वर्ष 1991 से चल रहे अतिप्राचीन स्वयंभू आदिविशेश्वर के दर्शन-पूजन और भव्य मंदिर के निर्माण की मांग की गई है। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। हाईकोर्ट ने एफटीसी कोर्ट को सभी पक्षों को सुनकर जल्द निस्तारण का आदेश दिया है।

शृंगार गौरी केस सहित चार केस की फाइलें पहुंचीं मध्यस्थता केंद्र

ज्ञानवापी के परिसर के एएसआई सर्वे और शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन सहित चार मुकदमों की फाइल मध्यस्थता केंद्र पहुंची है। अधिवक्ताओं के अनुसार पहले चरण में इन्हीं मुकदमों में दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश होगी।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि मध्यस्थता केंद्र पर चार मुकदमों से जुड़े सभी पक्षकार और उनके अधिवक्ता को बुलाया गया है। जिला जज कोर्ट में शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन की मांग से जुड़ी समेकित सात मुकदमों की फाइल पर बातचीत होनी है। इसी मुकदमे में सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत के आदेश पर कोर्ट कमीशन और बाद में एएसआई सर्वेक्षण हुआ था। अब इसमें पूरे परिसर और सभी तहखानों के सर्वेक्षण की मांग की गई है।

अधिवक्ता ने बताया कि एडीजे कोर्ट में लम्बित शैलेंद्र पाठक व्यास के मुकदमे पर वार्ता होनी है। इसमें शैलेंद्र पाठक व्यास ने खुद को व्यासजी के परिवार का सदस्य बताते हुए मुकदमों में पक्षकार बनाने की मांग की है। वही अधिवक्ता नित्यानंद राय के भी एक मुकदमे पर चर्चा होगी।

सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में चल रहे मुकदमे में कहा गया है कि ज्ञानवापी का स्वामित्व अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने ज्ञानवापी की प्रबंधन कमेटी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद से जमीन की अदला-बदली की है। अधिवक्ता ने सवाल उठाया है कि बिना स्वामित्व तय हुए जमीन देना-लेना गैरकानूनी और कोर्ट की अवमानना भी है।

लेखक के बारे में

Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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