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मुंह से बदबू आने पर नहीं छीन सकते नौकरी: पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

पटना उच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस के एक अधिकारी को बड़ी राहत दी है, जिसे शराब पीने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि अधिकारी के खिलाफ दोष साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था और मात्र मुंह से शराब की गंध आने के आधार पर बर्खास्तगी करना सही नहीं है।

13 जुलाई 2026 को 04:13 pm बजे
मुंह से बदबू आने पर नहीं छीन सकते नौकरी: पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

सौजन्य से:- Jansatta

Legal News: पटना उच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस के एक ऐसे अधिकारी को बड़ी राहत दी है, जिसे राज्य में शराब पीने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी के खिलाफ दोष साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं थे।

कोर्ट ने कहा है कि केवल मुंह से शराब की गंध आने के आधार पर यह मान लेना कि व्यक्ति ने शराब का सेवन किया है, पूरी तरह गलत और त्रुटिपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय और न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने एकल-न्यायाधीश के उस पुराने आदेश की पुष्टि की, जिसमें अधिकारी की बर्खास्तगी को अवैध माना गया था।

क्या है पूरा मामला?

प्रभावित पुलिस अधिकारी ने बिहार पुलिस में लगभग 32 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं। साल 2020 में उन्हें ‘सहायक सब-इंस्पेक्टर’ के पद पर पदोन्नत किया गया था। जब वे मोतिहारी पुलिस लाइन में तैनात थे, तब शराब पीने के संदेह में उनके घर पर छापा मारा गया था।

इसके बाद उनके खिलाफ बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई और विभागीय जांच शुरू कर दी गई। जुलाई 2020 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अधिकारी ने जब इसके खिलाफ विभागीय अपील की, तो उसे भी खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।

सरकार और पुलिस अधिकारी की दलीलें

राज्य सरकार के पक्ष की बात करें तो सरकारी वकील ने अदालत में तर्क दिया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और यहां शराब पीना एक गंभीर अपराध है। बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 75(3) के तहत ब्रेथ एनालाइजर (सांस विश्लेषक यंत्र) की रिपोर्ट को अदालत में वैध साक्ष्य (सबूत) माना जाता है, इसलिए अधिकारी पर की गई कार्रवाई सही थी।

दूसरी ओर पुलिस अधिकारी ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि उन पर लगे आरोप सिर्फ सांस की जांच में आई गंध पर आधारित थे। उनका कोई ब्लड या यूरिन टेस्ट (रक्त या मूत्र परीक्षण) नहीं कराया गया था। उन्होंने बताया कि उनका तपेदिक का इलाज चल रहा था और वे डॉक्टर की लिखी हुई खांसी की दवाइयां ले रहे थे, जिसकी वजह से मुंह से गंध आ सकती थी।

हाई कोर्ट ने पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि अधिकारी को दोषी ठहराने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कई कमियां थीं। कोर्ट ने कहा कि जिस डॉक्टर ने ‘ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट’ तैयार की थी, जांच के दौरान न तो उनकी गवाही ली गई और न ही उनसे कोई पूछताछ की गई। इस वजह से वह मेडिकल रिपोर्ट कानूनन साबित ही नहीं हो सकी।

शराब पीते नहीं देखा

जांच के दौरान जिन गवाहों के बयान दर्ज किए गए, उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें शराब की गंध आ रही थी। किसी भी गवाह ने अधिकारी को शराब पीते हुए नहीं देखा था और न ही उनके पास से कोई शराब बरामद हुई थी।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य मात्र अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं। यह पूरी तरह से ‘साक्ष्यहीनता’ (बिना सबूत) का मामला है। इस तरह के आधे-अधूरे निष्कर्षों के आधार पर किसी के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई कानूनी रूप से मान्य नहीं ठहराई जा सकती।

हाईकोर्ट ने दी बरकरार रखा फैसला

पटना हाई कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि बिहार के कानून के तहत ब्रेथ एनालाइजर की रिपोर्ट को सबूत माना जाता है, लेकिन इसे विभागीय जांच के दौरान कानूनी रूप से साबित करना जरूरी होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया। इसके अलावा, शराब के सेवन की पुष्टि के लिए कोई अन्य निर्णायक वैज्ञानिक जांच भी नहीं कराई गई थी।

अदालत ने माना कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी का बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण था क्योंकि इसमें अधिकारी के बीमारी और दवाओं वाले बचाव की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। एकल न्यायाधीश के फैसले में कोई कमी न पाते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और पुलिस अधिकारी को बहाल रखने का आदेश जारी रखा।

यह भी पढ़ें: ‘हम जनता के बीच आपको बेनकाब कर देंगे’, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार; जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मामले में विदेशी नागरिक की जमानत याचिका का विरोध करने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार का यही रवैया रहा तो वे उसे जनता के सामने बेनकाब कर देंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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