फर्जी बीमा दावों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हर राज्य में बनेगी विशेष जांच टीम
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना बीमा दावों में हो रही फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी राज्यों को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। नई दिल्ली: सुूुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना बीमा दावों में हो रही फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी राज्यों को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।
नई दिल्ली: सुूुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना बीमा दावों में बढ़ती कथित धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए सभी राज्यों को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बीमा कंपनियों को भी निर्देश दिया कि धोखाधड़ी का संकेत देने वाले सभी दावों को संबंधित राज्य की SIT के पास जांच के लिए भेजा जाए।
पीठ ने दिए चेतावनी
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने 17 अगस्त को दिए आदेश में चेतावनी दी कि यदि बीमा कंपनियों ने संदिग्ध दावों को सेलेक्टिव तरीके से जांच के लिए भेजा तो संबंधित कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के निर्देश
मामले की शुरुआत इस विवाद से हुई थी कि दुर्घटना में शामिल बताए जा रहे वाहन की पहचान सही थी या नहीं। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे मामलों का बड़ा पैटर्न सामने आया, जिसमें कथित तौर पर एक ही वाहन को अलग-अलग दुर्घटनाओं में शामिल दिखाकर फर्जी बीमा दावे किए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘‘बहुत बड़े पैमाने’’ पर हो रही धोखाधड़ी बताया और मामले का दायरा बढ़ाकर ऐसे दावों की जांच के निर्देश दिए।
बीमा कंपनियों के साथ असली उपभोक्ताओं पर भी असर
पीठ ने कहा कि फर्जी दावों से केवल बीमा कंपनियों पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ता, बल्कि इसका असर वास्तविक पॉलिसीधारकों पर भी पड़ सकता है। धोखाधड़ी के कारण बीमा कंपनियों की लागत बढ़ने से ईमानदार ग्राहकों को अधिक प्रीमियम देना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे पर्याप्त कर्मचारियों के साथ SIT गठित करें और बीमा कंपनियों से प्राप्त शिकायतों की तेजी से जांच करें।
राज्यों को अपनानी होगी ये बात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को यह भी बताना होगा कि ऐसी शिकायतों की जांच के लिए उन्होंने क्या प्रक्रिया अपनाई है। अदालत ने बीमा कंपनियों को अपने अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है, यदि SIT उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करती है या उनके खिलाफ FIR दर्ज होती है।
यूपी में 2,188 शिकायतें, 231 FIR
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत को दी गई। राज्य सरकार ने बताया कि संदिग्ध फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए विशेष SIT गठित की गई है। अब तक 2,188 शिकायतें मिली हैं। इनमें से 1,029 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है और 533 आरोपियों के खिलाफ 231 FIR दर्ज की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इसी तरह की व्यवस्था अपनानी चाहिए।
डिजिटल पोर्टल से जांच में मदद की संभावना
अदालत ने IRDAI, वित्त मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को भी कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया। सुनवाई में सुझाव दिया गया कि बीमा दावों और दुर्घटनाओं से जुड़े सरकारी डेटाबेस को आपस में जोड़ा जाए।
वाहन संबंधी जानकारी के लिए इन पोर्टलों का करे इस्तेमाल
वाहन संबंधी जानकारी के लिए VAHAN और SARATHI जैसे पोर्टल तथा सड़क परिवहन मंत्रालय के E-Detailed Accident Report (EDAR) पोर्टल का इस्तेमाल कर यह पता लगाया जा सकता है कि कोई वाहन या व्यक्ति पहले भी किसी अन्य दुर्घटना या बीमा दावे में शामिल रहा है या नहीं।
23 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ( MACT ) किसी दावे को धोखाधड़ी या मिलीभगत के आधार पर खारिज करता है तो बीमा कंपनी उसकी आंतरिक जांच करे और मामला तत्काल संबंधित राज्य की SIT को भेजे। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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