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सुप्रीम कोर्ट ने वकीयों के विरोध को हाई कोर्ट में भेजने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 20‑21 अगस्त को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन कर रहे वकीयों के कथित हमले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर, याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दायर करने को कहा। कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और वकीयों के संवैधानिक प्रदर्शन अधिकार को मान्यता दी, जबकि बार काउंसिल के अध्यक्ष की पदस्थता को अस्थायी बताया।

4 सितंबर 2026 को 03:33 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने वकीयों के विरोध को हाई कोर्ट में भेजने का निर्देश दिया

सौजन्य से:- ETV Bharat

'लीगल कॉकरोच'... मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए वकील, अदालत ने हाई कोर्ट जाने को कहा

भूषण ने दावा किया कि, बीसीआई चेयरमैन ने एक बयान जारी किया कि कुछ कानूनी कॉकरोच यहां प्रदर्शन कर रहे थे.

By Sumit Saxena

Published : September 3, 2026 at 3:21 PM IST

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 20 और 21 अगस्त को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन कर रहे वकीलों से कथित तौर पर मारपीट की घटना की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी.

वकीलों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान कहा जा रहा है कि, उन पर कथित तौर पर हमला हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से इस मामले की सीबीआई जांच और 20 और 21 अगस्त की घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग हाई कोर्ट से करें.

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने दलील दी कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया कार्यालय के बाहर वकीलों के प्रदर्शन के दौरान गुंडों ने कथित तौर पर उन्हें पीटा, जिन्होंने खुद को वकील बताया था. भूषण ने वकीलों की तरफ से मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की.

प्रशांत भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि वकीलों को, किसी भी नागरिक की तरह, प्रदर्शन करने का संवैधानिक रूप से सुरक्षित अधिकार है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उसके चेयरमैन के खिलाफ असहमति जताने पर उन पर हमला नहीं किया जा सकता. उन्होंने सीबीआई जांच और सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने पर जोर दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरी सबूत नष्ट होने का खतरा है.

प्रशांत भूषण ने दावा किया, "बीसीआई चेयरमैन ने गर्व से एक बयान जारी किया कि कुछ कानूनी कॉकरोच (legal cockroaches) यहां प्रदर्शन कर रहे थे और हमारे वकीलों ने आधी रात को आकर उन्हें पीटा. हम सीबीआई जांच और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं. हमें डर है कि बीसीआई फुटेज नष्ट कर दिया जाएगा."

बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना भी शामिल थे, ने कहा कि चूंकि कथित हमले नई दिल्ली में बीसीआई कार्यालय में हुए थे, इसलिए उन्हें (याचिकाकर्ता) दिल्ली हाई कोर्ट जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, इस मामले पर हाई कोर्ट अच्छे से विचार कर सकता है.

बेंच ने वकीलों के प्रदर्शन करने के अधिकार को माना लेकिन पूछा कि वे अपनी शिकायतें बताने के लिए अपने पास मौजूद कानूनी तरीकों का इस्तेमाल क्यों नहीं करते. सीजेआई ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़ा एक भी ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर कोर्ट ने विचार न किया हो. अदालत ने कहा कि, "अगर वे हमारे सामने आते, तो शायद हम इसे दूसरों के साथ सुनते..."

भूषण ने जोर देकर कहा कि वकीलों के विरोध करने के अधिकार को सिर्फ उनके पेशा की वजह से कम नहीं किया जा सकता. आखिरकार, भूषण याचिका वापस लेने और हाई कोर्ट जाने के लिए राजी हो गए, जिसके बाद बेंच ने रजिस्ट्री को सही आदेश पास करने का निर्देश दिया.

बुधवार को, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल बार काउंसिल ऑफ इंडिया के हर नीतिगत फैसले से तब तक “सक्रिया रूप से जुड़े रहें जब तक कि नए चुनावों के जरिए उसका पुनर्गठन न हो जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का पद पर बने रहना 2030 तक चलने वाला इंतजाम नहीं माना जा सकता. बेंच ने कहा कि पहली नजर में उनका पद सिर्फ तब तक अस्थायी ('प्रोटेम' कंटिन्यूएशन) है जब तक कि नया बना बार काउंसिल ऑफ इंडिया अपने पदाधिकारियों (ऑफिस-बेयरर्स) का चुनाव नहीं कर लेता.

ये भी पढ़ें: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

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