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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के साइबर अदालत के विरोध पर सवाल उठाया

सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने हाई कोर्ट द्वारा साइबर थाने और साइबर अदालत के गठन पर उठाए गए आपत्तियों के कारण पर प्रश्न उठाया। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को खारिज किया, यह कहते हुए कि सरकार को प्रशासकीय आदेश से न्यायिक व्यवस्था बदलने का अधिकार नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

30 अगस्त 2026 को 09:31 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के साइबर अदालत के विरोध पर सवाल उठाया

सौजन्य से:- Sanmarg Hindi Daily

हाई कोर्ट ने किया था खारिज

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

नई दिल्ली /कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना के बेंच ने सवाल किया है कि इससे हाई कोर्ट को ऐतराज़ क्यों है। बेंच ने कहा है कि जिस रफ्तार से साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं उस लिहाज से और अदालतों का गठन की जाने की आवश्यकता है। इस तरह के नए कोर्ट के गठन से हाई कोर्ट को आपत्ति क्यों है।

एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि साइबर थाने और साइबर अदालत के गठन के बाबत राज्य सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है। इसकी सुनवाई करते हुए बेंच ने उपरोक्त टिप्पणी की। बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी की जाने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने इस आधार पर इस अधिसूचना को खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार एक प्रशासकीय आदेश के तहत न्यायिक व्यवस्था में बदलाव नहीं कर सकती है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एसटीएफ का गठन 2019 में हुआ था और यह अधिसूचित अपराधों की जांच कर सकती है। राज्य सरकार को एसटीएफ थाने और स्पेशल कोर्ट का गठन करने का अधिकार नहीं है। जलपाईगुड़ी बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों की तरफ से हाई कोर्ट में इन अधिसूचनाओं के खिलाफ पीआईएल दायर की गई थी। पहली अधिसूचना 2025 में 30 जनवरी को और दूसरी 10 फरवरी को जारी की गई थी। पहली अधिसूचना के तहत सिलीगुड़ी में एसटीएफ का मुख्यालय स्थापित किया गया था। दूसरी में इस तरह के मामलों में न्यायिक अधिकार क्षेत्र बढ़ाया गया था। एसटीएफ के दो पुलिस थानों को क्रिमिनल कोर्ट की अधीन लाया गया था। साल्टलेक एसटीएफ को एसीजेएम बिधाननगर और एडिशनल जज स्पेशल कोर्ट के अधीन किया गया था।

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