भागदौड़ से भगोड़ा घोषित, अब नया मुकदमा
एक आरोपी को भगोड़ा घोषित करने के बाद नए मुकदमे के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने आरोपी की संपत्ति की जानकारी मांगी है और मामले की आगे की जांच के लिए हेड कांस्टेबल को नियुक्त किया गया है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
अदालत में पेश न होने पर आरोपी को भगोड़ा घोषित
फरीदाबाद में एक आरोपी को अदालत में बार-बार गैरहाजिर रहने के कारण भगोड़ा घोषित किया गया है। पुलिस ने संबंधित थाना प्रभारी को नए मुकदमे के आदेश दिए हैं। अदालत ने आरोपी की संपत्ति की जानकारी भी मांगी है और मामले की आगे की जांच के लिए हेड कांस्टेबल को नियुक्त किया गया है।
फरीदाबाद,अशोक जैन। अदालत के बार-बार समन और बुलावे के बावजूद अदालत में पेश न होने पर एक आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया गया। इसके बाद अदालत के आदेश पर खेड़ीपुल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, 20 मार्च 2022 को खेड़ीपुल थाना में मुकदमा संख्या 159 जुआ अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। यह मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीपक यादव की अदालत में विचाराधीन था।
अदालत की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान आरोपी पार्थ सिंह निवासी अमर नगर, पल्ला, फरीदाबाद, लगातार अदालत से गैरहाजिर रहा। कई अवसर दिए जाने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
प्रस्तावित निर्देश
इसी के चलते 20 नवंबर 2025 को अदालत ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। अदालत ने आरोपी की चल-अचल संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए तथा मामले से संबंधित सूचना अदालत की ऑनलाइन प्रणाली पर अपलोड कराने का आदेश दिया। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच हेड कांस्टेबल तुहीराम को सौंपी गई है। अब आरोपी की गिरफ्तारी और अदालत के आगामी आदेशों के अनुपालन की कार्रवाई की जाएगी।
सामान्य प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की देरी के बाद 3‑महीने की सीमा तोड़ते हुए आदेश सुनाया
- साइंस‑आधारित जांच व निजता: सुप्रीम कोर्ट ने किया जरूरी संतुलन पर ज़ोर
- शिवसेना पार्षद के डॉक्टर पर हमले के जमानत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए, सड़कों पर ऐसे लोगों का हक नहीं
- छह महीने से अधिक आरक्षित फैसले पर पुनः सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को आवेदन का अधिकार
- 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत: पेंडिंग ट्रैफिक चालानों का आसान निपटारा और बड़ी छूट
- सुप्रीम कोर्ट ने नगा उग्रवादी होपेसन निंगशेन की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर, अपील तक दिल्ली से बाहर न जाने की शर्त लगाई
- सच्चाई की तलाश में: सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल बाद दुष्कर्म के दोषी को रिहा किया
- हाईकोर्ट ने कहा: क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी मजिस्ट्रेट सीधे तलब कर सकते हैं

