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उमर खालिद के मामले पर केंद्र सरकार से सवाल, थरूर ने कहा, 'बिना मुकदमे के 6 साल तक जेल में रखना न्याय का मजाक है'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जेल में बंद दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद के मामले में केंद्र सरकार से सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है अगर उमर खालिद आतंकी है तो अदालत में साबित क्यों नहीं किया जाता है।

30 जून 2026 को 04:24 pm बजे
उमर खालिद के मामले पर केंद्र सरकार से सवाल, थरूर ने कहा, 'बिना मुकदमे के 6 साल तक जेल में रखना न्याय का मजाक है'

सौजन्य से:- Navbharat Times

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जेल में बंद दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद के मामले को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। उन्होंने कहा, अगर उमर खालिद आतंकी है, तो अदालत में साबित क्यों नहीं करते हैं?

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर जेल में बंद उमर खालिद के एक इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। थरूर ने कहा कि यदि उमर खालिद ने वास्तव में आतंकवाद को भड़काया है, तो सरकार इसे अदालत में साबित क्यों नहीं करती? उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही बिना मुकदमे के 6 साल तक जेल में रखना न्याय का मजाक है।

शशि थरूर ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'एक आसान सवाल उठता है कि अगर उमर खालिद दोषी हैं, तो उन्हें अदालत में अपना बचाव करने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने कहा कि 'बिना ट्रायल के वर्षों तक जेल में रखना लोकतंत्र पर एक धब्बा है और देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि ऐसा क्यों हो रहा है।'

उमर खालिद ने इंटरव्यू में क्या कहा?

सितंबर 2020 जेल जाने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में उमर खालिद ने कहा, 'जेल में सबसे मुश्किल समय सूर्यास्त का होता है, जब कैदियों को बैरक से बाहर मैदान में खड़ा रखा जाता है और तब यह एहसास सबसे ज्यादा होता है कि जिंदगी का एक और दिन कैद में गुजर गया।'

खालिद ने कहा कि 'लगातार उन्हें आतंकवादी और देशविरोधी के रूप में पेश किया गया, जिससे उनकी इंसानियत तक लोगों की नजरों में खत्म कर दी गई।' उनके मुताबिक, 'जब आपको सिर्फ एक छवि में बदल दिया जाता है, चाहे वह नकारात्मक हो या सकारात्मक, तब अपनी इंसानियत और मानसिक संतुलन बचाए रखना भी मुश्किल हो जाता है।'

उन्होंने कहा कि जेल के भीतर भी कुछ कैदी पीठ पीछे उन्हें आतंकवादी कहते हैं। उनके शब्दों में, "यह प्रचार लोगों की नजरों में मुझे इंसान नहीं रहने देता। इंसानियत जैसे लोगों के लिए एक विशेषाधिकार बन गई है।"

उमर खालिद ने कहा कि छह वर्षों की कैद ने उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। उन्होंने बताया कि बार-बार जमानत की उम्मीद टूटने से धीरे-धीरे उम्मीद खत्म होने लगी। 'जब उम्मीद ही खत्म होने लगे तो जेल में जीवित रहना मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन हो जाता है।'

क्या है मामला?

उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर UAPA जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस का आरोप है कि वह दंगों की साजिश के प्रमुख आरोपियों में शामिल थे। खालिद इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं। उन्हें अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है और मामले का ट्रायल शुरू नहीं हुआ है।

वहीं, केंद्र सरकार और भाजपा का कहना रहा है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से चल रही है। हालांकि मामला अदालत के विचाराधीन है। भाजपा ने राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को लगातार खारिज किया है।

लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।

विशेषज्ञता

उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।

पत्रकारिता अनुभव

रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।

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मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें

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