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बंगाल का नया कानून vs ब्रिटिश 'पब्लिक सेफ्टी बिल': कितना अलग है?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा ने नए सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक 2026 पेश किया है, जिससे कई लोगों को याद आया है 1929 का विवादास्पद ब्रिटिश कानून। लेकिन क्या वास्तव में दोनों में समानता है?

30 जून 2026 को 11:25 am बजे
बंगाल का नया कानून vs ब्रिटिश 'पब्लिक सेफ्टी बिल': कितना अलग है?

सौजन्य से:- ABP News

अंग्रेजों के 'पब्लिक सेफ्टी बिल' से कितना अलग है बंगाल का नया कानून? भगत सिंह ने इसी के खिलाफ फेंका था असेंबली में बम

Public Safety Bill: पश्चिम बंगाल में वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल 2026 पास किया गया है. आइए जानते हैं क्या है यह कानून.

- पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक 2026 पारित किया है।

- इसकी तुलना 1929 के विवादास्पद ब्रिटिश कानून से की जा रही है।

- दोनों कानूनों में निवारक निरोध का प्रावधान मुख्य समानता है।

- नया कानून संगठित अपराधों पर केंद्रित, संपत्ति जब्त करेगा।

Public Safety Bill: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल 2026 पास कर दिया है. क्योंकि इसका नाम 1929 के विवादित पब्लिक सेफ्टी बिल से मिलता जुलता है इस वजह से कई लोग दोनों की तुलना कर रहे हैं. ब्रिटिश युग के उस कानून को इस वजह से याद किया जाता है क्योंकि उसके विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली में बम फेंके थे. हालांकि प्रीवेंटिव डिटेंशन जैसी एक समानता के बावजूद दोनों कानून के मकसद, ऐतिहासिक संदर्भ, कानूनी ढांचे और लक्षित समूह में काफी ज्यादा अंतर है.

भगत सिंह ने ब्रिटिश पब्लिक सेफ्टी बिल का विरोध क्यों किया था?

ब्रिटिश पब्लिक सेफ्टी बिल 1929 औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए पेश किया गया था. इस बिल का मकसद ब्रिटिश प्रशासन को ऐसे अधिकार देना था जिनसे वे राजनीतिक कार्यकर्ता, क्रांतिकारी, ट्रेड यूनियन नेता और कम्युनिस्ट को बिना किसी ठोस कानूनी सुरक्षा के हिरासत में ले सकें, देश से निकाल सकें या फिर जेल में डाल सकें. इसी औपनिवेशिक कानून और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली में बम फेंके थे.

बंगाल के 2026 के कानून का मकसद

पश्चिम बंगाल सरकार के मुताबिक पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक गतिविधि पर नियंत्रण विधेयक 2026 संगठित अपराध और सामाजिक गतिविधि पर रोक लगाकर कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पेश किया गया है. सरकार के मुताबिक यह कानून दंगे, अवैध खनन, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और जनता में डर पैदा करने वाली गतिविधि जैसे अपराधों पर केंद्रित है.

क्या है दोनों कानून के बीच समानता?

दोनों कानून के बीच सबसे बड़ी समानता प्रीवेंटिव डिटेंशन का प्रावधान है. दरअसल दोनों कानून अधिकारियों को यह अधिकार देते हैं कि वे किसी भी इंसान को बिना आपराधिक मुकदमे के एक तय समय के लिए हिरासत में रख सकते हैं. बंगाल के कानून के तहत कुछ मामलों में प्रीवेंटिव डिटेंशन की अवधि 12 महीने तक हो सकती है.

हालांकि ब्रिटिश कानून के उलट नए कानून में अधिकारियों के लिए हिरासत का आधार बताना जरूरी है और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के जरिए हिरासत को चुनौती देने का भी मौका मिलता है.

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तब किसे निशाना बनाया जाता था और अब किसे निशाना बनाया जा रहा है?

1929 के ब्रिटिश कानून में आजादी की लड़ाई लड़ने वालों, मजदूर नेता, राजनीतिक कार्यकर्ता और औपनिवेशिक शासन का विरोध करने वालों को निशाना बनाया जाता था. लेकिन बंगाल के कानून में असमाजिक तत्वों की परिभाषा में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो संगठित अपराध, हिंसक दंगे, अवैध खनन, जबरन वसूली, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क में शामिल माने जाते हैं.

संपत्ति जब्त करना एक और नया प्रावधान

एक और बड़ा अंतर वित्तीय वसूली के उपाय को शामिल करना है. दरअसल पब्लिक सेफ्टी बिल के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार ने वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर बिल भी पास किया है. इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति दंगों या फिर हिंसा के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया जाता है तो सरकार उसकी संपत्ति जब्त करके मुआवजे की वसूली कर सकती है.

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