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एथेनॉल आपूर्ति आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति राखी, केंद्र को अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल आपूर्ति आवंटन से जुड़े विवाद में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को अंतरिम राहत दी है।

30 जून 2026 को 06:25 pm बजे
एथेनॉल आपूर्ति आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति राखी, केंद्र को अंतरिम राहत

सौजन्य से:- ChiniMandi

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल सप्लाई ईयर (ईएसवाई) 2025-26 के लिए एथेनॉल आपूर्ति आवंटन से जुड़े विवाद में फिलहाल यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया है। यह मामला राष्ट्रीय एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप से जुड़ा है।न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक मौजूदा एथेनॉल आवंटन व्यवस्था को बरकरार रखने का निर्देश दिया।

अटॉर्नी जनरल ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को एक समर्पित एथेनॉल उत्पादक की याचिका पर विचार कर वर्ष 2025-26 के लिए उसके एथेनॉल आवंटन में वृद्धि करने का निर्देश दिया गया था। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि, यह आदेश लॉन्ग टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट (एलटीओए) के तहत पहले ही पूरी हो चुकी खरीद प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है और इससे पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई-20 लक्ष्य) हासिल करने की केंद्र सरकार की नीति प्रभावित हो सकती है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि याचिकाकर्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख क्यों नहीं किया। इस पर अटॉर्नी जनरल ने बताया कि ईएसवाई 2025-26 के लिए एथेनॉल आपूर्ति अनुबंध अक्टूबर 2025 में केंद्रीय खरीद प्रणाली के तहत अंतिम रूप दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार के कई मामले विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित हैं, इसलिए एकरूपता बनाए रखने के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जाए, ताकि परस्पर विरोधी न्यायिक आदेशों से बचा जा सके।

यह विवाद एम/एस वीआईएनपी डिस्टिलरीज एंड शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था। कंपनी राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 के तहत एक समर्पित एथेनॉल संयंत्र (डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट) संचालित करती है। कंपनी का कहना था कि उसने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) और एलटीओए के आधार पर अपनी उत्पादन क्षमता विकसित की थी।याचिका के अनुसार, संयंत्र की वार्षिक स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 9.90 करोड़ लीटर है और उसने ईएसवाई 2025-26 के लिए 9.26 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया था। इसके बावजूद उसे केवल 1.44 करोड़ लीटर का आवंटन किया गया, जिसे कंपनी ने मनमाना और अनुबंध की भावना के विपरीत बताया।

हाईकोर्ट में बीपीसीएल की ओर से अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया था कि खरीद समझौते में शामिल “बेस्ट एंडेवर” और प्राथमिकता आवंटन संबंधी प्रावधान किसी आपूर्तिकर्ता को ऐसा कानूनी अधिकार नहीं देते, जिसे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के माध्यम से लागू कराया जा सके। उन्होंने कहा कि आवंटन पर पुनर्विचार का निर्देश देना नीति निर्माण और अनुबंध के क्रियान्वयन में न्यायिक हस्तक्षेप के समान होगा, जिसकी कानून अनुमति नहीं देता।

हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि एलटीओए व्यवस्था और ओएमसी के पूर्व आचरण के आधार पर याचिकाकर्ता की वैध अपेक्षा (लेजिटिमेट एक्सपेक्टेशन) बनती है। अदालत ने कहा कि समर्पित एथेनॉल संयंत्रों को अन्य उत्पादों का उत्पादन करने या तीसरे पक्ष को एथेनॉल बेचने की अनुमति नहीं होती, इसलिए बदली हुई आवंटन प्रणाली के कारण उन्हें नुकसान पहुंचाना मनमाना और व्यावसायिक रूप से अनुचित होगा।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि समझौते की धारा 6.8 के तहत ओएमसी को निर्देशित करने के लिए रिट ऑफ मंडेमस जारी किया जा सकता है। अदालत ने उल्लेख किया कि इसी प्रावधान के आधार पर पहले भी ओएमसी ने कंपनी का आवंटन 1.44 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 3.92 करोड़ लीटर किया था।

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