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पैदल यात्रियों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, सुरक्षित फुटपाथ पर राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए हर सड़क पर सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ सुनिश्चित करने पर जोर दिया। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से फुटपाथ संबंधी निर्देशों और केंद्र की एड…

24 अगस्त 2026 को 06:56 pm बजे
पैदल यात्रियों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, सुरक्षित फुटपाथ पर राज्यों से मांगा जवाब

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए हर सड़क पर सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ सुनिश्चित करने पर जोर दिया। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से फुटपाथ संबंधी निर्देशों और केंद्र की एडवाइजरी पर जवाब मांगा है।

नई दिल्ली: सड़क पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ इंसानी जिंदगी का अहम हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे पैदल चलने वालों के लिए सही तरीके से चिह्नित और अतिक्रमण मुक्त जगह सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर जवाब दें। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया।

हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए जगह जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क होने पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिह्नित जगह होनी चाहिए। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि पहला कदम पैदल चलने वालों की जगह को सही तरीके से चिह्नित करना है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे सुरक्षित रूप से पैदल चल सकते हैं।

फुटपाथ पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि पैदल चलने के लिए बनाई गई जगह पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। फुटपाथ को मोटर वाहनों की लेन से भी उचित तरीके से अलग रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने वालों को बिना चलती गाड़ियों के खतरे के स्वतंत्र रूप से चलने का भरोसा मिलना चाहिए।

केंद्र ने राज्यों को जारी की एडवाइजरी

केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि सड़कें राज्य का विषय हैं। इसके बावजूद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और NHAI को एडवाइजरी जारी की है। इसमें पैदल चलने वालों के लिए सही तरीके से चिह्नित जगह उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

राज्यों से एडवाइजरी पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन एडवाइजरी पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने 3 अगस्त को भी केंद्र को निर्देश दिया था कि हर सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए स्पष्ट रूप से चिह्नित जगह सुनिश्चित की जाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने को भी कहा था।

पैदल चलने का अधिकार मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून के अहम फैसले में कहा था कि चिह्नित फुटपाथ पर चलने का अधिकार मौलिक अधिकार है। कोर्ट के अनुसार यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत आवाजाही की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है। अदालत ने कहा था कि इस अधिकार को मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जाएगी।

दुखद हादसे के मामले से जुड़ा फैसला

शीर्ष अदालत का यह महत्वपूर्ण फैसला एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में आया था। इस मामले में एक पिता ने अपने पांच वर्षीय बेटे को स्कूल ले जाते समय खो दिया था। कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग III के तहत मौलिक अधिकार है। तय फुटपाथ पर सुरक्षित पैदल चलना भी इसी अधिकार का हिस्सा है।

स्थानीय निकायों की भी होगी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगरपालिकाएं और पंचायतें भी पैदल यात्रियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ बनाना, उनका रखरखाव करना और उन्हें अतिक्रमण से बचाना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकार के उल्लंघन पर नागरिक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुआवजे और सुधार के लिए संवैधानिक और कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 12 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स और क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग का काफी अनुभव है। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले 6 साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने की अच्छी समझ है।

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पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 12 साल से कार्यरत हैं।

JIMMC नोएडा से साल 2013 में पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले साल 2010 में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद (सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ) से राजनीतिक शास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। लोक प्रशासन विषय पर खास पकड़ है। पत्रकारिता से पहले यूपीएससी और उत्तराखंड और यूपी पीसीएस एग्जाम की तैयारी के दौरान समाजशास्त्र, संविधान समेत कई विषयों का अध्ययन किया। संवेदनशील मुद्दों पर लिखने की खास कला है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कई मार्मिक लेख लिखे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है, कई बार सफलता भी मिली है। पत्रकारिता में आगे और बेहतर सीखने और समझने का क्रम जारी है।... और पढ़ें

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