कोलकाता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट को रद्द कर विशेष सांसद‑विधायक अदालत में स्थानांतरित किया
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कृष्णनगर कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को रोकते हुए इसे निरस्त कर दिया और मामले को एमपी‑एमएलए कोर्ट में भेजने का आदेश दिया। यह कदम महुआ मोइत्रा की टिप्पणी पर लगाए गए धार्मिक भावना आहत करने के आरोप से शुरू हुए आपराधिक मामले के संदर्भ में लिया गया। अदालत ने कहा कि सांसदों के विरुद्ध मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत ही उपयुक्त है।

सौजन्य से:- etvbharat.com
महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी का खतरा टला: हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर लगाई रोक, जानें क्या है पूरा मामला
महुआ मित्रा ने एक बयान में कहा था "बुर्का पहनकर अंडे फेंको..." जिसके बाद उनके खिलाफ धार्मिक भावना आहत होने का आरोप लगा.
Published : September 7, 2026 at 5:44 PM IST
कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कृष्णनगर कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही, पीठ ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को सांसदों और विधायकों के लिए बनी विशेष कोर्ट (एमपी-एमएलए) में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है. फिलहाल, कृष्णनगर सांसद की गिरफ्तारी का खतरा टल गया है.
सोमवार को जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस अर्जयक दत्त की पीठ ने गिरफ्तारी वारंट को लेकर कृष्णनगर कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया. अदालत ने फैसला सुनाया कि महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामले की सुनवाई विधायकों और सांसदों के लिए नामित विशेष अदालत में होगी. इसी के तहत, मामले को बिधाननगर (कोलकाता) के न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर करने के आदेश जारी किए गए.
यह मामला महुआ द्वारा की गई एक टिप्पणी से शुरू हुआ था. आरोप है कि 1 जुलाई को एक मुद्दे पर बोलते हुए महुआ ने कहा था, "इस तरह अंडे फेंकने के बजाय, बुर्का पहनकर फेंको; फिर तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं होगी." शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं. बाद में उसी शिकायत के आधार पर महुआ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
अदालत को सूचित किया गया कि महुआ को निचली अदालत द्वारा कई मौकों पर समन भेजा गया था. तय समय पर उनके अदालत में पेश न होने के कारण, आखिरकार 19 अगस्त को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया.
हालांकि, महुआ के वकील ने हाई कोर्ट में दलील दी कि वारंट जारी होने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था. उन्होंने दावा किया कि महुआ वास्तव में सुनवाई की निर्धारित तारीख, 18 अगस्त को अदालत में पेश हुई थीं. लेकिन, वकीलों की हड़ताल के कारण उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी. इसके अगले ही दिन यानी 19 अगस्त को मामला फिर से सुनवाई के लिए आया और उसी दिन महुआ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया.
महुआ के वकील ने आगे यह सवाल भी उठाया कि क्या निचली अदालत के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार था भी या नहीं, क्योंकि महुआ मोइत्रा एक सांसद हैं. इसके चलते, उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों के लिए बनी विशेष (एमपी-एमएलए) अदालत में होनी चाहिए.
इस दलील पर कार्रवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने आज निचली अदालत के गिरफ्तारी वारंट को रद्द कर दिया और मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया.
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