हिमाचल हाईकोर्ट ने वाइस चांसलर चयन नियम रद्द, नया प्रक्रिया अनिवार्य किया
हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के वाइस चांसलर चयन नियमों को असंवैधानिक ठहराकर रद्द किया और 2026 के भर्ती विज्ञापनों को खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा में मानक निर्धारण केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के प्रतिनिधि को चयन समिति में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने सरकार और चांसलर को यूजीसी नियमों के क्लॉज‑7.3 के तहत नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
पालमपुर व नौणी यूनिवर्सिटी मामले में कानून संशोधन रद्द, हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक, नए सिरे से चयन प्रक्रिया के आदेश
यूजीसी के नियमों के मुताबिक, सर्च कमेटी में कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता जो यूनिवर्सिटी से सीधे तौर पर जुड़ा हो.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 8:58 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है. हाईकोर्ट ने प्रदेश के कृषि व बागवानी यूनिवर्सिटीज में वाइस चांसलर के चयन को लेकर राज्य सरकार की तरफ से कानून में किए गए संशोधनों, वर्ष 2026 में बनाए नियमों और उनके तहत जारी भर्ती विज्ञापनों को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस संदर्भ में नरेंद्र सांख्यान व संजीव चौहान की तरफ से दाखिल याचिकाओं को मंजूर करते हुए ये अहम फैसला सुनाया है.
दरअसल, राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटीज ऑफ एग्रीकल्चर, हार्टीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री एक्ट, 1986 में संशोधन किया था. इसके अनुसार वाइस चांसलर के चयन व नियुक्ति प्रक्रिया का नियंत्रण राज्य सरकार ने अपने हाथ में लिया था. नए नियमों के तहत सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी के गठन का अधिकार सरकार को दिया गया था. कमेटी तीन नामों का पैनल सरकार को सौंपती और सरकार उसमें से एक नाम चुनकर कुलाधिपति यानी चांसलर (राज्यपाल) को भेजती. इस प्रक्रिया में चांसलर को सरकार की सलाह और सहायता पर काम करने के लिए बाध्य किया गया था. इसके अलावा, चयन समिति में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के मुखिया के नामित सदस्य को शामिल नहीं किया गया था। यह स्पष्ट रूप से यूजीसी नियमों का उल्लंघन था.
न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर की अगुवाई वाली खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा के संस्थानों में मानकों का निर्धारण और समन्वय करना संविधान की संघ सूची के तहत केंद्र सरकार और संसद के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है. खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से किया गया संशोधन और बनाए गए नियम अनिवार्य यूजीसी रेगुलेशंस, 2018 के खिलाफ है. यूजीसी के नियमों के मुताबिक, सर्च कमेटी में कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता जो यूनिवर्सिटी से सीधे तौर पर जुड़ा हो. वहीं, राज्य के नियमों में मुख्य सचिव या प्रशासनिक अधिकारियों को इसमें जगह दी गई थी.
हाईकोर्ट ने पालमपुर के चौधरी सरवण कुमार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री के लिए वाइस चांसलर्स की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 26 फरवरी 2026 के विज्ञापनों को खारिज कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार और चांसलर को निर्देश दिया है कि वे यूजीसी रेगुलेशंस 2018 के क्लॉज 7.3 के प्रावधानों के तहत एक नई चयन प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें, जिसमें चयन समिति में यूजीसी के प्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए.
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